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जानिए भकूट दोष, कारण और निवारण के उपाय

जानिए भकूट दोष, कारण और निवारण के उपाय

शादी जीवन का एक ऐसा निर्णय है जिसको बहुत ही सोच समझ कर लेना चाहिए और अगर आपने गलत निर्णय ले लिया तो आपके पूरे जीवन भर सिर्फ पछतावा ही हाथ लगेगा ।  कुण्ड़ली में अनेक प्रकार के दोष पाये जाते है, जो कि जातक को बुरे फलों का संकेत देते है, उन्हीं दोषों में से एक है कुण्ड़ली का भकूट दोष। यह एक ऐसा दोष है जिसका पता हमें अक्सर विवाह के पूर्व लगता है, क्योंकि जब हम विवाह के लिए कुण्ड़ली का मिलान कराते है तो ज्योतिषी के द्वारा पता चलता है, कि आपकी कुण्ड़ली में भकूट दोष है। कुण्डली में अगर इस प्रकार का कोई दोष है तो हम विवाह का निर्णय नही कर सकते है। किसी प्रकार से अगर विवाह तय भी हो जाता है तो विवाह के बाद वैवाहिक जीवन में अनेक प्रकार की बाधायें उत्पन्न होती है और कभी-कभी तो ऐसी भी स्थिति आ जाती है कि तलाक के लिए कोर्ट का दरवाजा तक खटखटाना पड़ता है।

भकूट दोष के कारण ज्योतिष के अनुसार जब चन्द्रमा जन्म कुंडली की जिस राशि में स्थित होता है वह राशि कुंडली का भकूट कहलाता है। जन्मकुंडली में भकूट दोष का निर्णय वर और वधू की जन्म कुंडलियों में चन्द्रमा जिस राशि में स्थित होता है उन दोनों राशियों अथवा चन्द्रमा का क्या सम्बन्ध है उसके ऊपर निर्भर करता है। यदि वर-वधू की कुंडलियों में चन्द्रमा परस्पर एक दूसरे 6-8, 9-5 या 12-2 राशियों में स्थित हों तो भकूट मिलान में 0 अंक दिया जाता हैं तथा इसे भकूट दोष माना जाता है। कुण्ड़ली मिलान में अगर भकूट का परिणाम अगर शून्य प्राप्त होता है तो विवाह को रोक दिया जाता है ।

किन स्थितियों में भकूट दोष का प्रभाव होता है, नगण्य (परिहार) –

  1. यदि कुंडली मिलान में ग्रहमैत्री, गणदोष तथा नाड़ी दोष नहीं है और भकूट दोष है तो भकूट दोष का प्रभाव कम हो जाता है।
  2. यदि दोनो कुंडलियों में नाड़ी दोष नहीं है तो भी भकूट दोष होने के बाद भी इसका प्रभाव कम हो जाता है।
  3. यदि वर-वधू दोनों की जन्म कुंडलियों में चन्द्र राशियों के स्वामी आपस में मित्र हैं तो भी भकूट दोष का प्रभाव कम हो जाता है जैसे कि मीन-मेष तथा मेष-धनु में भकूट दोष होता है परन्तु उसका प्रभाव कम होता है क्योंकि इन दोनों ही राशियों के स्वामी गुरू तथा मंगल हैं जो कि आपस में मित्र हैं।
  4. वर वधु की कुंडली में चन्द्रमा मकर-कुंभ राशियों में होकर भकूट दोष का निर्माण कर रहा है तो एक दूसरे से 12-2 स्थानों पर होने के पश्चात भी भकूट दोष नहीं माना जाता है क्योंकि इन दोनों राशियों के स्वामी शनि हैं।
  5. वर-वधू दोनों की जन्म कुंडलियों में चन्द्रमा मेष-वृश्चिक तथा वृष-तुला राशियों में होने पर षडाष्टक की स्थिति में भी भकूट दोष नहीं माना जाता है क्योकि क्योंकि मेष-वृश्चिक राशियों का स्वामी मंगल हैं तथा वृष-तुला राशियों का स्वामी शुक्र हैं। अतः एक ही राशि होने के कारण दोष समाप्त माना जाता है।

भकूट दोष के उपाय

वर-वधू दोनों के लिए महामृत्युंजय का जाप करवायें एवं गऊ दान करें ।

यदि आपकी कुण्ड़ली भकूट दोष से ग्रषित है और आप इसका निवारण कराना चाहते है, तो आप विश्व प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य गुरुदेव जी.डी. वशिष्ठ जी से संपर्क करें ।

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