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लता मंगेशकर

प्रसिद्ध गायिका लता मंगेशकर जी का जन्म 28 सितम्बर,1929 मे इंदौर मे एक सामान्य परिवार मे हुआ। उनके पिता जी का नाम दीनानाथ मंगेशकर था जो कि संगीत और कला के कार्य से जुड़े हुए थे।  श्रीमती लता मंगेशकर की जन्मकुंडली मे बुध की महादशा उनको 1929-1945 तक प्रभावित करती रही जोकि बुध की सारी खूबियां इनके अंदर रही और इसी ने इनको मधुर वाणी प्रदान की।

 


Celebrity Horoscope लता मंगेशकर Kundli
  • नाम:- लता मंगेशकर
  • जन्म की तारीख:- 28-09-1929
  • जन्म का समय:- 10:30 PM
  • जन्म का स्थान:- Indore, Madhya Pradesh
  • सूचना स्रोत:- Internet
Celebrity Horoscope लता मंगेशकर Kundli

लता मंगेशकरका राशिफल :-

लता मंगेशकर जी की जनमकुंडली मे पंचम भाव मे बुध होने के कारण संगीत का क्षेत्र उनको अपने पिता से विरासत से ही मिला लेकिन उनकी जनमकुंडली मे पंचम भाव बने मंगल बुध व केतू के योग ने और उस पर खराब राहू की दृष्टि ने उनके पिता का सुख काफी कम उम्र मे ही खत्म कर दिया और बचपन मे ही संघर्ष वाला जीवन प्रदान किया ! लता मंगेशकर जी की जनमकुंडली मे गुरु बारहवे स्थान पर होने के कारण उनको ज्ञान को बाटने का काफी शौक रहा लेकिन इसी कारण उनको अपनी पढ़ाई के सुख नहीं मिल पाई इसी महादशा के समय मे उनको कई असफलताओ का सामना करना पड़ा ! लता मंगेशकर की जनमकुंडली केतू बुध के योग ने उनको कई भाषा का ज्ञान दिया ! कला के क्षेत्र मे अच्छे संपर्क बनाने का काम प्रक्रम भाव मे मौजूद शुक्र ने दिया ! श्रीमति लता मंगेशकर की जनमकुंडली मे जसे ही केतू की महादशा 1945 – 1952 का आगमन हुआ उनको अपनी मेहनत की पहली सफलता प्राप्त हुई ! लता मंगेशकर की जनमकुंडली मे बने मंगल बुध के योग के कारण उनके स्वभाव मे गुस्से वाली प्रवृति रही और इसी योग के कारण उनको अपने पूरे परिवार का मुखिया बनकर पालने की क्षमता प्रदान की ! श्रीमति लता मंगेशकर की जनमकुंडली मे समृद्धि देने वाले केतू ने न सिर्फ इनको नाम दिया बल्कि स्टेज भी प्रदान किया जहा से इन्होने अपनी खूबियो का जमकर प्रदर्शन किया ! बुध मे मौजूद सूर्य ने केतू को प्रभावित किया जिस वजह से इनको हॉस्पिटल मे जाना पड़ा


लता मंगेशकर जी की जन्मकुंडली में पंचम भाव मे बुध होने के कारण संगीत का क्षेत्र उनको अपने पिता से विरासत में ही मिला लेकिन उनकी जन्मकुंडली में पंचम भाव बने मंगल बुध व केतु के योग ने और उस पर खराब राहु की दृष्टि ने उनके पिता का सुख काफी कम उम्र मे ही खत्म कर दिया और बचपन मे ही संघर्ष वाला जीवन प्रदान किया। लता मंगेशकर जी की जन्मकुंडली मे गुरु बारहवें स्थान पर होने के कारण उनको ज्ञान को बांटने का काफी शौक रहा लेकिन इसी कारण उनको अपनी पढ़ाई के सुख नहीं मिल पाएं। इसी महादशा के समय मे उनको कई असफलताओ का सामना करना पड़ा।

 

लता मंगेशकर की जन्मकुंडली में केतु बुध के योग ने उनको कई भाषा का ज्ञान दिया। कला के क्षेत्र मे अच्छे संपर्क बनाने का काम पराक्रम भाव मे मौजूद शुक्र ने दिया। श्रीमती लता मंगेशकर की जन्मकुंडली मे जैसे ही केतु की महादशा (1945 – 1952) का आगमन हुआ उनको अपनी मेहनत की पहली सफलता प्राप्त हुई। लता मंगेशकर की जन्मकुंडली मे बने मंगल बुध के योग के कारण उनके स्वभाव मे गुस्से वाली प्रवृत्ति रही और इसी योग के कारण उनको अपने पूरे परिवार का मुखिया बनकर पालने की क्षमता प्रदान की।

 

श्रीमती लता मंगेशकर की जन्मकुंडली मे समृद्धि देने वाले केतु ने न सिर्फ इनको नाम दिया बल्कि स्टेज भी प्रदान किया जहां से इन्होंने अपनी खूबियों का जमकर प्रदर्शन किया। बुध मे मौजूद सूर्य ने केतु को प्रभावित किया जिस वजह से इनको हॉस्पिटल जाना पड़ा। जैसे ही श्रीमती लता मंगेशकर की जन्मकुंडली मे शुक्र की महादशा आई, लता जी ने पीछे मुड कर नहीं देखा। लेकिन शुक्र की राशि मे मौजूद गुरु की वज़ह से गृहस्थ का सुख नहीं मिला । शुक्र राहु की हो रही टक्कर ने भी नेम-फेम तो बहुत दिया लेकिन गृहस्थ का सुख नहीं दिया और साथ ही शुक्र की राशि मे बैठे बुध और मंगल ने परिवार से काट कर रखा साथ ही इसी योग ने विदेश यात्रा भी कराई।

 

श्रीमती लता मंगेशकर की जन्मकुंडली मे 1972-1978 मे सूर्य की महादशा के अंतराल मे शुक्र जो की सूर्य की राशि मे बैठे ग्रह ने धनभाव के चंद्रमा को जोकि जन्म कुंडली मे उच्च मे बैठे है इनकी आवाज़ को और भी अच्छा बनाया। इसी दशा के अंतराल मे उनको राजनीति के लोगो से संपर्क बनाया साथ ही इन्होंने अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों को बखुभी निभाया साथ ही शारीरिक ऊर्जा भी प्राप्त की। जब श्रीमती लता मंगेशकर की जन्मकुंडली मे चंद्रमा की महादशा का आगमन हुआ जो इनको 1978-1988 तक प्रभवित करती रही जिसमे लता जी ने अपनी कला को एक नये अंदाज़ से प्रस्तुत किया। इसी अंतराल मे इनको आर्थिक समृद्धि और आध्यात्मिकता का स्तर बढ़ा। लता मंगेशकर की जन्मकुंडली मे बैठे शनि ने इनको जनता के बीच प्रसिद्ध किया।

 

श्रीमती लता मंगेशकर की जन्मकुंडली मे मंगल की महादशा जोकि 1988-1995 तक इनको प्रभावित करती रही। मंगल का जन्मकुंडली मे पंचम भाव मे बैठे होने के कारण इनको भाई का सुख नहीं मिला । इसी समय इनको काफी मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा । पंचम स्थान के मंगल केतु ने इन्हे कमर और पांव से संबंधित बिमारियां दी लेकिन इसी मंगल ने इनको तीव्र बुद्धि वाला बनाया।

 

श्रीमती लता मंगेशकर की जन्मकुंडली मे राहु की महादशा 1995-2013 तक रही जोकि इनके लिए विशेष लाभदायक नहीं रही। आय और व्यय के स्थान पर बैठे राहु ने इनकी सेहत को खराब किया। इसी महादशा के दौरान इनके शरीर मे कई बीमारियों ने जन्म लिया लेकिन बुध राहु की दृष्टि ने उनको खूब काम भी दिया लेकिन लोगो से उनको प्रशंसा नहीं मिली। लता मंगेशकर की जन्मकुंडली मे राहु की दशा ने जाते-जाते इनको एक अच्छा शिक्षक बना दिया। श्रीमती लता मंगेशकर की जन्मकुंडली मे अभी गुरु की महादशा चल रही है जो की 2013 – 2029 तक इनको प्रभावित करती रहेगी। 2013 – 2015 गुरु मे गुरु का समय चला जिसने एक आदर्शवादी महिला के रूप मे युवाओं का मार्गदर्शक मार्ग दर्शन किया।

 

 2015 - 2017 तक गुरु मे शनि का समय काफी परेशानी वाला रहा। श्रीमती लता मंगेशकर की जन्मकुंडली मे सुखेश बुध दो ग्रहो सूर्य और मंगल के साथ युति बनाकर गुरु को पीड़ित कर रहा है, जिसकी वजह से इनको शरीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ा जोकि इनको 2017-2021 तक परेशानियों के योग बनाएगा । गुरु की राशि मे मौजूद शनि ने इनको काफी प्रसिद्धि प्रदान की। 2023 से 2024 मे इनको सूर्य से अच्छे परिणाम देखने को मिलेंगे।

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