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सौरव गांगुली

सौरव चंडीदास गांगुली जो पूर्व भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी और पूर्व भारतीय राष्ट्रीय टीम के कप्तान रहे है। वर्तमान में, वो क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ़ बंगाल के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त है साथ ही विजडन इंडिया के साथ संपादकीय बोर्ड के अध्यक्ष भी है। अपने खेल करियर के दौरान, गांगुली ने खुद को दुनिया के अग्रणी बल्लेबाजों में से एक के रूप में दिखाया था और राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के सबसे महान कप्तानों में से एक बने थे। 


Celebrity Horoscope सौरव गांगुली Kundli
  • नाम:- सौरव गांगुली
  • जन्म की तारीख:- 08-07-1972
  • जन्म का समय:- 01:00
  • जन्म का स्थान:- Kolkata
  • सूचना स्रोत:- Internet
Celebrity Horoscope सौरव गांगुली Kundli

सौरव गांगुलीका राशिफल :-

राहु (1988-2006) इस महादशा ने इनकी जिन्दगी में चार चाँद लगा दिये। इसी समय के दौरान ओ.डी.आई. में मैच खेलने का मौका मिला, साथ ही इस महादशा में राहु के अंतर के गुरू ने इनमें सबके नजरों में एक दादा का दर्जा दिया। सन् 1995 - 96 में मंगल और शनि जो कि राहु के मित्र है के योग के समय इनको द्वित्तीय ट्राफी और राष्ट्रीय स्तर के मैचो में अपना हुनर दिखाया, लेकिन राहु-सूर्य के अंतर में ये विवादों में घिरे रहे । साथी ही इस महादशा के दौरान ही इनको राहु में मित्र ग्रह और पराक्रम भाव में उच्च कें ग्रह सूर्य की वजह से इनमें विश्व का सरताज बना दिया। इसी महादशा के दौरान इनके यहां कई भव्य आयोजन भी हुये । गुरू (2006 - 2022) यह दशा इनमें कैरियर और व्यवसायिक उपलब्धियों के लिए उत्तम रहीं। लग्नेष गुरू अपने ही स्थान पर मौजूद होकर इनको हर तरह की उपलब्धिया, ज्ञान और कामकाज की रणनीति में माहिर कर दिया। साथ ही लग्नेष और पराक्रम के मित्र ग्रह होने की वजह से इनको काफी अच्छा परिवारिक और कार्यक्षेत्र में सहयोग मिला साथ ही महादशा में इन्होनें मिडिया और खेल के क्षेत्र में गुरू की भूमिका का निर्वाह मिला। राजनैतिक चर्चाओं में रहें। आगे आने वाला समय इनको राष्ट्र स्तर पर सम्मान दिलाऐगा और खेल जगत के युवाओं के लिए ये एक शिक्षक के रूप में भागेदारी निभाऐंगें ।


यह बाएं हाथ से मध्य क्रम में बल्लेबाजी किया करते थे और एक अच्छे ओपनर बल्लेबाज भी रहे है। भारतीय क्रिकेट स्टार सौरभ गांगुली का जन्म 8 जुलाई 1972 में कलकत्ता में हुआ। इनका जन्म चन्द्र की महादशा में हुआ। चन्द्रमा इनकी कुंडली में धनभाव में उच्च राशि में मौजूद है। वृष के शुक्र, शनि की वजह से इनके पिताजी का कारोबार बहुत ही अच्छा रहा है l साथ ही इनकी वाणी में उदारता और सबसे घुल-मिलने का व्यवहार इनको चन्द्र ने दिया। मंगल (1981-1988) इस मंगल की महादशा में लग्नेष के मालिक मंगल की वजह से इनमें काफी अच्छी समृद्धि और खेलकूद के प्रति आकर्षित करवाया साथ ही इस महादशा की वजह से ही इनके किस्मत के द्वार खोले और मित्रों ने विजय पताका का मालिक बना दिया।

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