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सुनील दत्त

सुनील दत्त का जन्म मंगल की महादशा  में 6 जून 1929 में पंजाब के झेलम जिले में हुआ। सुनील दत्त का असली नाम बलराज दत्त था। सुनील ने मुम्बई के जयं हिन्द कॉलेज में दाखिला लिया मंगल की यह दशा 1928 से 1935 तक इनको प्रभावित करती रहीं। मंगल लग्न और सूर्य की राशि के साथ बैठकर अपनी मेहनत और लग्न लगाकर काम करने को प्रेरित  किया लेकिन आर्थिक स्थिति को ठीक करने के लिए  कण्डक्टर की नौकरी भी की।


Celebrity Horoscope सुनील दत्त  Kundli
  • नाम:- सुनील दत्त
  • जन्म की तारीख:- 06-06-1929
  • जन्म का समय:- 23:30
  • जन्म का स्थान:- झेलम, पाकिस्तान
  • सूचना स्रोत:- इंटरनेट से
Celebrity Horoscope सुनील दत्त  Kundli

सुनील दत्त का राशिफल :-

अपने कैरियर की शुरूआत रेडियों सीलोन पर जो कि दक्षिण एशिया का सबसे पुराना रेडियो स्टेशन है,एक उद्घोषक के रूप् में लोकप्रिय हुए यह दशा राहु की थी जिसके कारण इलेक्ट्रोनिक व आधुनिक चीजों में रूचि होने के साथ काम-काज को अच्छी सफलता दिलाई लेकिन यह काम कुण्डली के अनुसार सही नही था राहु की यह दशा 1953 तक ही इनके साथ रहीं अष्टम के राहु होने के कारण मानसिक परेशानियां और अपने गुस्से पर काबु ना पाने का भी काम किया। जिस समय गुरू की दशा का आगमन हुआ यह समय सुनील दत्त का सबसे सुनहरा मौका था जिसमें इन्होंने फिल्मों के क्षेत्र में अपने कदम जमाऐं और अपने अभिनय, मेहनत और शुक्र, बुध के मेल ने इनको एक अच्छी एक्टर के रूप में दुनिया के आगे अपने आप को पेश किया। सन् 1955 का यह दौर गुरू की महादशा का था जिसके कारण अपने आपको सफलता दिलाने का काम किया और अपनी पहली फिल्म रेलवे स्टेशन में काम किया । लेकिन 1957 की मदर इंडिया ने उन्हें सफलता पूर्वक एक फिल्म स्टार बना दिया उनकी सबसे बेहतरीन फिल्म 1964 में आई मुझे जीने दो में सफलता नें सर्वश्रेष्ट अभिनेता के रूप में पुरस्कृत किया। गुरू की यह दशा 16 साल तक इनको प्रभावित करती रही और कई तरह कें पुरस्कार से नवाजे गऐ। इसी बीच एक फिल्म की शूटिंग के दौरान नरगिस को बचाते समय फिल्म मदर इंडिया में आग लग गयी थी जिसमे बुरी तरह जल गयें थे। इस घटना से प्रभावित होकर नरगिस की मां ने अपनी बेटी का विवाह 11 मार्च 1958 में सुनील दत्त से कर दिया था।


सुनील दत्त की कुण्डली में गुरू, शुक्र व बुध ग्रह के महत्वपूर्ण योंगो के कारण काफी कल्याण के कार्य में भी रहें और साथ ही उन्होंने अपनी शुरू की अच्छी स्थिति व शादी के बाद अच्छे भाग्य बन जाने से उन्होंने 1984 में उन्हें मुम्बई सरकार के प्रत्याशी के रूप में नियुक्त किया गया यह समय शनि की महादशा को पल रहा था। जो कि सन् 1969 से 1988 तक इनके जीवन को प्रभावित करती रहीं जिसके कारण अपनी पत्नी नरगिस को 1981 में कैंसर जैसी बीमारी के कारण खो दिया। बुध की महादशा का जैसे ही आगमन हुआ सुनील दत्त को कई तरह की अवार्ड से सम्मानित किया इसमें सबसे बड़ा अवार्ड भारत गौरव सम्मान व पद्मश्री अवार्ड भी शामिल है। 25 मई 2005 सुनील दत्त को दिल का दौरा पड़ने के कारण मृत्यु हो गई कुण्डली में सूर्य के स्थान पर बैठे शनि ने और सूर्य, शनि के घर में बैठकर दिल से संबंधित रोग दिये जिसके कारण यह घटना हुई।

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