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जानिए कैसे होते है, मूल नक्षत्र में जन्मे बच्चे ? (Know How are the Children Born in the Mool Nakshatra-Main Constellation?)

जानिए कैसे होते है, मूल नक्षत्र में जन्मे बच्चे ? (Know How are the Children Born in the Mool Nakshatra-Main Constellation?)

प्रश्न – गंडमूल दोष से प्रभावित बच्चों की मूल शान्ति क्यों आवश्यक है ?

उत्तर – ज्योतिष के अनुसार जब किसी बालक का जन्म इन पाँच नक्षत्रों अश्विनी, रेवती, अश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा और मूल में होता है तो ऐसा बालक गंडमूल के दोष से पीड़ित होते है।मूल नक्षत्र के बारे में कहा गया है कि बच्चा तो इस दोष से प्रभावित रहता ही है साथ में उसके पिता को कठिन से कठिन परेशानीयों का सामना करना पड़ सकता है। गंड मूल से प्रभावित बालक, सामान्य बालक की तुलना में थोड़े से अलग होते है और इनका स्वभाव कुछ जिद्दी, व गुस्सैल होता है। छोटी –छोटी बातों में गुस्सा आना इनके लिए आम बात होती है। समय के रहते हुए अगर बच्चे की मूल शान्ति की पूजा करवा देते है तो इस परेशानी से बच सकते है और ऐसा नही करते है तो बच्चे के जीवन में उसे उसकी मेहनत के बराबर कभी भी फल प्राप्त नही होते है और जीवनभर परेशानी उसका पीछा नही छोड़ती है।

लाल किताब उपाय – मूल शान्ति की पूजा बच्चे के जन्म से 27 दिन के अंदर करवा लेनी चाहिए। यह पूजा उसी नक्षत्र में करवानी चाहिए जिस मूल नक्षत्र में बालक का जन्म हुआ है। संभव हो सके को 27 दिन तक पिता को बालक का मुँह नही देखना चाहिए ।

Question: Why is Mool Shanti (for peace) important for children affected by Gandamool Dosh-defect?

Answer: According to Astrology, when some child is born in these five Nakshatras - Ashwini, Revati, Ashlesha, Magha, Jyeshtha, and is in the main ‘Mool’, then such a child is a victim of Gandamool Dosh- defect. It is said about Mool Nakshatra, that the child remains affected by this Dosh-defect, along with it, his-her father gets to face the toughest of tough problems. A child affected by Gandamool, is a little different to normal child, and their behavior-temperament is somewhat stubborn and angry. It is common for them to get angry on small matters-things. While time is in hand, if prayer-worship is done for main peace, then can avoid - get saved from this problem, and if it is not done so, then the child will never get equal to the reward-fruit of his-her hard work in life; and for lifetime, problems never leave him-her.

Lal Kitab Remedy: The Mool Peace prayer-worship should be done within 27 days from the birth of the child. This prayer-worship should be done in that Nakshatra, in which Nakshatra is born in. If possible, then the father should not see the face of the baby for 27 days.

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