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कब प्राप्त होगा तीर्थ यात्रा का शुभ फल ?

कब प्राप्त होगा तीर्थ यात्रा का शुभ फल ?

प्रश्न – तीर्थ यात्रा क्यों करनी चाहिए ?

उत्तर – परमात्मा की मानसिकता इंसानों की जैसी नही होती है। आज के समय में लगभग हर इंसान की यही मानसिकता बनकर रह गई है, तीर्थ यात्रा में हम जितनी ज्यादा परेशानियों का सामना करेंगे भगवान हमें उतना ज्यादा फल देंगे, ऐसा बिल्कुल भी नही है। परमात्मा एक ही शब्द बोलता है कि आप जो कुछ भी करते हो वो नैतिकता से, सात्विकता से , नियम से करो क्योंकि परमात्मा को नियम पसंद है और जितना भी करों उसके अंदर शुद्धता हो। किसी अन्य की आत्मा न दुःखित हो, न ही किसी को अपके द्वारा कोई तकलीफ हो, तभी परमात्मा आपके साथ है। इन सब नियमों का पालन करने के बाद यदि आप तीर्थ यात्रा करते है तो आपको तीर्थ यात्रा का पूरा-पूरा लाभ मिलता है। घर से आप निकलते तीर्थ यात्रा के नाम पर है और पूरे रास्ते भर बिजनेस की बातें करते रहते है, आपका मन इधर-उधर भटकता है और न जानें क्या-क्या सोचते है, जैसे कि घर में क्या हो रहा होगा, उसको ऐसा बोला था क्या उसने ऐसा काम कर लिया होगा या नही किया होगा जो लोग तीर्थ यात्रा में होते हुए भी मन में ऐसी बाते लाते है उनकी तीर्थ यात्रा बिल्कुल भी फलीभूत नही होती है। इसी कारण तीर्थ यात्रा के विपरीत फल भी मिलते है, जो कि बहुत बड़े घातक भी होते है।


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