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AQUARIUS

(सूर्यराशि) तिथि सीमा :-
20 जनवरी से 18 फरवरी तक
राशि का स्वामी :-
शनि
आकृति/ चिन्ह :-
मटका/ घड़ा
शुभ दिन :-
मंगलवार और शनिवार
शुभ रंग :-
जामुनी (बैंगनी)
शुभ अंक :-
3
शुभ रत्न :-
नीलम रत्न और बेरुज़ रत्न
संगत राशियाँ :-
मिथुन, तुला और कुंभ
Kundli

कुंभ राशि के जातक :-

कुंभ राशि वाले जातको का स्वामी शनि होने के कारण इनके स्वभाव मे आक्रामकता और तेज़ समान्यतः देखने को मिलता है। ये जातक दृढ़ निश्चयी और मेहनती होते है। लोगो से मिलना जुलना और मित्र बनाना इनके स्वभाव का लक्षण है। ये नया प्रिय और सत्य के उपासक होते है। परोपकार की भावना कूट –कूट कर भरी होती है। व्यवहार मे गतिशीलता इनकी पहचान है। परंतु तर्कसंगत और विचारवान होने के कारण किसी कार्य मे निर्णय लेने मे अधिक समय लगते है। कार्यस्थल और व्यवहारिक जीवन मे चुनौतियों के प्रिय होते है। कार्यकुशल होते है और अपने मेहनत से हि हासिल की गयी सफलता पर विश्वास करते है। इनके जीवन मे शॉर्टकट जैसी कोई चीज़ नहीं होती है।


प्रतीक क्या निर्धारिक करते है:-

कुंभ राशि वाले जातको का प्रतीक /चिह्न घड़ा या मटका होने की वजह से स्वभाव मे गहरापन देखने को मिलता है। अर्थात प्रथमदृष्ट्या इन्हे कोई बता नहीं सकता की इनके मन के भीतर क्या चल रहा है। मन और व्यवहार मे भिन्नता देखने को मिलती है जिससे इनके चरित्र को समझ पाना बेहद मुश्किल का काम है।


किन चीज़ों की है कमी:-

इनके स्वभाव का गहरापन कभी-कभी लोगो को दुविधा मे डाल देता है। बाहर से कुछ और और अंदर से कुछ और होते है। ड़िंगे हांकना और बात को बढ़ा चढ़ा कर बोलना इनके व्यवहार मे शामिल है। इन जातको को दिन मे सपने देखने की आदत होती है। और ये उन्ही सपनों मे खोये रहते है। अपने अंदर मची खलबली को दूसरों से साझा नही करते है मन हि मन कुढ़ते रहते है।


रंग-रूप और शारीरिक बनावट:-

कुंभ राशि के जातक अत्यधिक आकर्षक दिखते है। लंबी कद-काठी के साथ पतले होते है। शरीर पर बालो की उपस्थितिअधिक होती है। अत्यधिक गंभीर और सुंदर दिखते है। आंखे सुंदर और चमकदार होती है बढ़-बोलापन या दिखावे की प्रकृति होती है।


प्रेम संबंध और पारिवारिक जीवन :-

कुंभ राशि के जातक अत्यधिक रोमांटिक होते है। प्रेम संबंधो मे अत्यधिक उतावलापन दिखाते है अर्थात कामुक प्रवृति के होते है। प्रेम के बदले प्रेम की उम्मीद अपने साथी से करते है। जिसमे संतुलन की स्थिति ना होने पर झगड़े उत्पन्न होते है। दाम्पत्य जीवन मे आने के बाद अपने जीवनसाथी के प्रति पूर्ण निष्ठा का भाव रखते है परंतु नवीनता की प्रधानता इनके चरित्र मे विवाह को बंधन मानने लगती है इस कारण कभी कभी इनके वैवाहिक जीवन मे द्वेष भी उत्पन्न हो जाता है।

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