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SAGITTARIUS

(सूर्यराशि) तिथि सीमा :-
22 नवंबर से 21 दिसंबर तक
राशि का स्वामी :-
बृहस्पति
आकृति/ चिन्ह :-
धनुष (अश्व-नर धनुर्धर)
शुभ दिन :-
बृहस्पतिवार और रविवार
शुभ रंग :-
पीला, गुलाबी
शुभ अंक :-
3,9
संगत राशियाँ :-
मेष ,सिंह और धनु
Kundli

धनु राशि के जातक :-

धनु राशि वाले जातको का स्वामी बृहस्पति इनके विशाल एवं महान चरित्र को प्रदर्शित करता है। इनके स्वभाव मे उत्साह और तत्परता देखने को मिलती है। लेकिन कभी कभी इनका अति उत्साही स्वभाव काम बिगाड़ देता है। किसी कार्य की पहले पहल करने से बचते है। साथ ही निर्णय लेने की क्षमता कम होती है। इस कारण वकालत और राजनीति के क्षेत्र मे इनके लिए कम अवसर है। दूसरों के प्रति उपकार को मानने वाले होते है अर्थात कृतिज्ञ प्रवृति के होते है। काम मे ईमानदारी और वफादारी की भावना कूट –कूट कर भरी होती है। जिज्ञासु प्रवृति के होते है। इसलिए हर तरफ से ज्ञानार्जन का मार्ग खुला रखते है। किसी बात या कार्य पर लंबी बहस या देरी होने पर इनका धैर्य जवाब दे जाता है। धैर्य धारण करने की क्षमता कम होती है। सकारात्मक सोच के साथ कर्म की प्रधानता मे विश्वास रखते है।


प्रतीक क्या निर्धारिक करते है:-

धनुराशि वाले जातको का प्रतीक चिह्न अश्व-नर धनुर्धर है। जिसमे एक अश्व समान नर जिसके नीचे का भाग घोड़े का तथा ऊपरी भाग एक धनुर्धारी मनुष्य तीर साढ़े हुए रहता है जो की लक्ष्य के प्रति अडिग रहने का संकेत देता है। ये लोग कर्म की प्रधानता मे विश्वास रखते है। किसी कार्य के प्रति सजगता और सटिकता इनके चरित्र का केंद्र बिन्दु है। इनके स्वभाव मे अश्व समान गतिशीलता है परंतु निर्णय लेने मे ठहराव देखने को मिलता है।


किन चीज़ों की है कमी:-

धनु राशि के जातक खून के रिश्तो मे भी दूरी बरतते है। ये लोग अपनो से भी दूर ही रहना पसंद करते है। इसलिए परिवार और घर से इनका कुछ खास लगाव नही होता है। निर्णय लेने की कम क्षमता इन्हे कई क्षेत्रो मे पिछाड़ देती है। मदिरापान और बुरी आदते इन्हे बहुत जल्दी पकड़ लेती है। लोगो से उलझने और बेकार के झगड़ो मे पड़ने के कारण ये अधिकतर बुरी परिस्थिति मे फस जाते है और इनके अनेको शत्रु बन जाते है।


रंग-रूप और शारीरिक बनावट:-

धनु राशि वाले जातक औसत से अधिक लंबाई के होते है। जिसके कारण 30 वर्ष की आयु तक पहुँचते हुए रीढ़ की हड्डी मे संकुचन के कारण कुछ झुक कर चलने लगते है। जो बुढ़ापा का पहला लक्षण है। इन राशि के जातको मे समय से पहले बुढ़ापा आ जाता है। युवावस्था मे अत्यधिक सुंदर और आकर्षक नज़र आते है। लंबे घने काले बाल के साथ मनमोहक दिखते है।


प्रेम संबंध और पारिवारिक जीवन :-

प्रेम संबंधो मे चंचलता और खुशमिजाजी इनके स्वभाव का प्रमुख लक्षण है। ये अपने साथी से हँसी मज़ाक और विनोद का भाव रखते है । संबंधो मे समरसता और ईमानदारी बरतते है। ये लोग रोमांटिक होते है जिससे ये अपने जीवनसाथी को हमेशा खुश रखते है। अनुशासित रहना पसंद करते है और दूसरों से भी ऐसी ही चाह रखते है। काम मे लापरवाही इन्हे बिलकुल भी प्रिय नही है।

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