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SCORPIO

(सूर्यराशि) तिथि सीमा :-
23 अक्टूबर से 21 नवंबर तक
राशि का स्वामी :-
मंगल
आकृति/ चिन्ह :-
बिच्छू
शुभ दिन :-
सोमवार और बृहस्पतिवार
शुभ रंग :-
लाल और भूरा (मिट्टी का रंग)
शुभ अंक :-
9
शुभ रत्न :-
लाल मूंगा रत्न और तामड़ा रत्न
संगत राशियाँ :-
कर्क, वृश्चिक और मीन
Kundli

वृश्चिक राशि के जातक :-

वृश्चिक राशि वाले जातको का स्वामी मंगल होने के कारण ये लोग स्वभाव से आक्रामक और गर्म मिजाज के होते है। इनका जीवन रहस्यो से भरा हुआ होता है। और ये अपनी बनाई रणनीति को किसी के साथ सांझा नही करते है। इस कारण दूसरों को इन्हे समझ पाना बेहद मुश्किल का काम है। चरित्र मे निर्भीकता और साहस झलकता है।किसी भी परिस्थिति मे किसी के सामने घुटने नही टेकते। विपरीत परिस्थिति को अपने हक़ मे बनाना इन्हे भली भांति आता है। अपनी बातों को दूसरों पर थोपना और दूसरों की बातों को नही मानना इनके स्वभाव का लक्षण है। इनकी जिज्ञासु प्रवृति हर क्षेत्र मे इनके लिए नई राह खोलती है। जिससे ये लोग किसी भी क्षेत्र मे हाथ आजमा सकते है । साथ ही ज्ञानार्जन का मार्ग सदैव खुला रखते है।


प्रतीक क्या निर्धारिक करते है:-

वृश्चिक राशि वाले जातको का प्रतीक चिह्न बिच्छू होने के कारण स्वभाव मे आक्रामकता ही इनकी सबसे बड़ी पहचान है। वैसे देखा जाए तो रोज़मर्रा की ज़िंदगी मे शांत दिखने का प्रयास करते है परंतु इनके अंदर का दंश कब जागृत अवस्था मे आ जाए कुछ कहा नही जा सकता इसलिए जरूरी है की इनके साथ विनम्र स्वभाव से पेश आया जाए।


किन चीज़ों की है कमी:-

इन राशि के जातको की सबसे बड़ी समस्या इनका रहस्यमयी होना है अर्थात ये लोग किसी बात को अपने अंदर ही दबा लेते है और किसी के सामने उजागर नही होने देते जिससे लोगो को इन्हे समझने मे भ्रम पैदा होता है। इनकी तेज़ बुद्धि कभी-कभी अपने लिए ही मुसीबत का कारण बन जाती है। इनमे बदला लेने की भावना होती है। इस कारण इनसे दुश्मनी बहुत महंगी पड़ सकती है।


रंग-रूप और शारीरिक बनावट:-

वृश्चिक राशि के जातक लंबी कद काठी और चौड़े छाती वाले होते है। इनकी हथेली नाक ,कान या इंद्रियों पर तिल या मस्से का निशान मिलता है। बाल भूरे और कुछ घुंघरैले होते है। इस राशि की महिला जातक अत्यधिक सुंदर होती है। माथा चौड़ा परंतु आंखे धसी हुई होती है। इनके चेहरे से आत्मविश्वास झलकता है।


प्रेम संबंध और पारिवारिक जीवन :-

जहां तक बात कि जाये तो वृश्चिक राशि वाले जातक प्रेम के भूके होते है। ये अपने साथी से भी उसी प्रकार के प्रेम की आश रखते है जैसा की ये उनके प्रति दिखते है। जिसमे संतुलन ना बन पाने के कारण इनके रिश्ते टूटते-बनते रहते है। इनके लिए प्रेम सिर्फ जिस्मानी रिश्ता नही है बल्कि विचारो का मेल है। दाम्पत्य जीवम मे प्रवेश कर चुके जातक अपने जीवन साथी से कुछ ज्यादा कि उम्मीद करते है। अपनी बाते उन पर थोपना और अपने साथी की ना सुनना कई बार भयंकर समस्या का कारण बन जाती है।

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