rahu mahadasha

जाने लाल किताब के द्वारा राहु की महादशा को खुश करने के रामबाण उपाय

ज्योतिष में नौ ग्रहों को पापी और मित्र ग्रहों में विभाजित किया गया है, जिनमें राहु ग्रह की गिनती पापी ग्रहों में की जाती है। राहु को छाया या मायावी ग्रह कहा जाता है और इसी के कारण ग्रहण लगता है।

खगोल विज्ञान में राहु ग्रह का कोई महत्व नहीं है, लेकिन ज्योतिष जगत में राहु ग्रह एक विशेष महत्व रखता है क्योंकि इसकी अच्छी-बुरी स्थिति व्यक्ति के जीवन को कई तरह से प्रभावित करती है। एस्ट्रोसाइंस के इस विशेष ब्लॉग में आपको राहु ग्रह से संबंधित विशेष और रोचक जानकारियां प्राप्त होंगी। 

राहु ग्रह की उत्पत्ति

ऋगवेद और विष्णु पुराण में राहु ग्रह का जिक्र मिलता है और पौराणिक कथा के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान जब अमृत प्रकट हुआ, तो उसे प्राप्त करने के लिए एक राक्षस ने देवता का भेष धारण कर देवताओं के साथ अमृत पान कर लिया था, जिसके बाद भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से उसका सिर धड़ से अलग कर दिया, लेकिन अमृत पान करने के कारण उसकी मृत्यु नहीं हुई, जिसके चलते उसका सिर और धड़ दोनों ही जीवित रहे। सिर वाले हिस्से को राहु और धड़ वाले हिस्से को केतु कहा गया।

यह भी पढ़ें: लाल किताब के ज्योतिषीय सिद्धांतों का परिचय

राहु का जन्म हिरण्यकश्यप की बहन सिहिंका के गर्भ से हुआ था, इसलिए राहु को “सिंहिकेय” भी कहा जाता है।

यह भी पढ़ें: लाल किताब ज्योतिष रहस्य और उपाय

लाल किताब के अनुसार राहु ग्रह

ज्योतिष जगत में लाल किताब अपने सरल उपायों और फलादेश के लिए बहुत प्रसिद्ध है, लेकिन यह पारंपरिक वैदिक ज्योतिष से बिल्कुल अलग है। लाल किताब में राहु ग्रह को अच्छे-बुरे विचार के लिए जिम्मेदार माना जाता है। लाल किताब के अनुसार सूर्य, चंद्र और मंगल ग्रह राहु के दुश्मन ग्रह माने जाते हैं, तो वहीं बुध, शनि और केतु, राहु के मित्र ग्रह हैं।

राहु ग्रह किसी भी राशि का स्वामी नहीं है, यह प्रेम-प्रसंग या प्रेम संबंधों के लिए जिम्मेदार होता है। ज्योतिष के अनुसार व्यक्ति की कुंडली में राहु ग्रह की शुभ-अशुभ स्थिति व्यक्ति  के जीवन पर प्रभाव डालती है।

यह भी पढ़ें: लाल किताब उपाय आपकी वित्तीय स्थिरता बढ़ाएंगे

राहु ग्रह का जीवन पर प्रभाव

लाल किताब के अनुसार राहु ग्रह अपने शत्रु ग्रहों के साथ कमजोर होता है और अपने मित्र ग्रहों के साथ प्रबल। जन्मकुंडली में यदि राहु अपने मित्र ग्रहों के साथ बैठा हो, तो शुभ परिणाम देता है। ऐसे में राहु ग्रह व्यक्ति के जीवन को सकारात्मक और नकारात्मक दोनों रूप से प्रभावित करता है।

यह भी पढ़ें: एस्ट्रोसाइंस ऐप सटीक ज्योतिष भविष्यवाणियों और उपचारों के लिए

जन्मकुंडली में अगर राहु अच्छी या शुभ स्थिति में हो, तो व्यक्ति हाजिरजवाब, तीव्र बुद्धि वाला होता है, दिमाग में सुविचार आते हैं और कार्यों में सफलता प्राप्त होती है।

अगर जन्मकुंडली में राहु बुरी या अशुभ स्थिति में हो, तो व्यक्ति मक्कार, बीमारियों का शिकार, शारीरिक या मानसिक रूप से पीड़ित रहता है।

राहु की महादशा

महादशा शब्द का अर्थ होता है महा यानी ज्यादा और दशा यानी समय अवधि। सरल भाषा में कहें तो महादशा वह समय अवधि है, जिसमें ग्रह सबसे शक्तिशाली या प्रबल होता है, लेकिन व्यक्ति की कुंडली में ग्रहों की स्थिति और योग के अनुसार व्यक्ति के जीवन पर अच्छा या बुरा प्रभाव पड़ता है।  

राहु की महादशा 18 वर्ष की होती है, जो 3, 6, और 9 साल के शुभ-अशुभ क्रम में चलता है और सबसे ज्यादा समस्या राहु महादशा के छठे और आठवें साल में आती है।

जन्मकुंडली में यदि राहु शुभ ग्रहों के साथ बैठा हो, तो महादशा की अवधि में भी व्यक्ति को शुभ परिणाम देकर रंक से राजा बना सकता है, लेकिन यदि कुंडली में राहु अशुभ ग्रहों के साथ या अशुभ भाव में हो, तो जीवन में बहुत सी समस्याएं लेकर आता है।

राहु महादशा के लक्षण

जन्मकुंडली में राहु की महादशा अधिकतर लोगों को जीवन में बर्बादी की राह पर ले जाती है। राहु की महादशा के शुरुआत होने पर जीवन में बदलाव आने लगते हैं, जो इस प्रकार हैं:

1. अचानक ही धन की हानि या बर्बादी होना।

2. चिंता, तनाव और चिड़चिड़ा हो जाना, स्वाभाव में नकारात्मक बदलाव।
 
3. इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स का बार-बार खराब होना या चोरी हो जाना।
  
4. दिमाग में बेतुके और गंदे विचारों का आना और हर किसी पर शक करना।

5. अक्सर बीमार रहना या लंबी बीमारी लग जाना।

6. घर में दीमक लगना, घर के कचरे को लेकर लड़ाई-झगड़े हो जाना।

7. व्यक्ति का गलत कामों और बुरी आदतों के प्रति आकर्षण का बढ़ना।

8. आस-पास के वातावरण का अस्वस्थ हो जाना, गंदगी का बढ़ना।

9. घर में जंगली कबूतरों का घोंसला बनना, छोटे जंगली पेड़ों का उग आना।

10. ज्यादा कमाई करने के लिए गलत और उल्टे रास्तों को अपनाने की चाह का जागना।

यह सभी लक्षण राहु की महादशा के होने की शुरुआत होने की पुष्टि करते हैं।

लाल किताब के अनुसार राहु महादशा के उपाय

यदि राहु की महादशा के कारण जीवन में ऊपर लिखित समस्याएं उत्पन्न होती हैं या जीवन पर बुरा प्रभाव पड़ता है, तो उनसे मुक्ति  पाने के लिए आइए जानते हैं लाल किताब के कुछ सरल और प्रभावी उपाय:

1. हाथ की मध्यमा उंगली में लोहे का छल्ला पहनें।

2. गरीबों की मदद करें, उन्हें जरूरत की चीजें दान करें।

3. नियमित रूप से छिन्नमस्ता स्तोत्रम 108 बार सुनें।

4. राहु की महादशा में व्यक्ति को शनिवार के दिन बरगद के पेड़ की पूजा करनी चाहिए।

5. राहु के शुभ फल पाने के लिए चांदी का एक सिक्का हमेशा अपने पास रखें।

6. राहु की महादशा से पीड़ित व्यक्ति को गंगा स्नान जरूर करना चाहिए।

7. सुगंधित चीजें लगाएं, अपने आस-पास के वातावरण को स्वच्छ और सुगंधित रखें।

8. काले कुत्ते को खाना खिलाएं।

9. पूजा-पाठ कर सकारात्मक रहने का प्रयास करें।

10. खराब इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इस्तेमाल न करें।

Get Your Personalized Lal Kitab Now

निष्कर्ष

जन्मकुंडली में राहु की महादशा में केवल बुरे परिणाम ही नहीं, बल्कि अच्छे परिणाम भी प्राप्त होते हैं। यह पूर्णतः कुंडली में ग्रहों की स्थिति पर निर्भर करता है।

हम आशा करते हैं कि एस्ट्रोसाइंस के इस विशेष ब्लॉग से आपको राहु की महादशा से संबंधित नवीन और रोचक जानकारियां प्राप्त हुई होंगी।

अपनी समस्या या सवाल भेजें- https://shorturl.at/deLT9

FAQs

Q1. राहु की महादशा कितने साल की होती है?

राहु की महादशा 18 साल चलती है और इसकी शुभ-अशुभता कुंडली की स्थिति पर निर्भर करती है।

Q2. राहु की महादशा के मुख्य लक्षण क्या होते हैं?

अचानक नुकसान, तनाव, इलेक्ट्रॉनिक सामान खराब होना, घर में गंदगी और नकारात्मक विचार बढ़ना इसके सामान्य लक्षण हैं।

Q3. लाल किताब में राहु को शांत करने के घरेलू उपाय क्या है?

लोहे का छल्ला पहनना, काले कुत्ते को खाना खिलाना, चांदी का सिक्का रखना और शनिवार को बरगद की पूजा करना सबसे प्रभावी माने जाते हैं।

Back to blog

Our Recent Blog

बुध अमृत धूप

बुध अमृत धूप – जानिए उपयोग की सही विधि, अद्भुत...

लाल किताब की दिव्य परंपरा में 'बुध ग्रह' को ग्रहों का राजकुमार माना गया है। बुध हमारी बुद्धि, वाणी (संचार), व्यापार, और निर्णय लेने की क्षमता का स्वामी है। यदि...

Read more
शुक्र अमृत धूप – उपयोग करने की विधि, अद्भुत लाभ और प्रभाव

शुक्र अमृत धूप – उपयोग करने की विधि, अद्भुत लाभ...

भारतीय ज्योतिष और लाल किताब की प्राचीन परंपराओं में ग्रहों की शांति और उनकी कृपा प्राप्त करने के अनेक उपाय बताए गए हैं। इन्हीं उपायों में 'धूप' या 'सुगंध' का...

Read more
Bussiness ke liye lal kitab ke upay

बिजनेस में अपार सफलता के लिए लाल किताब के सिद्ध...

व्यापार (Business) केवल धन कमाने का जरिया नहीं है, बल्कि यह किसी भी व्यक्ति के सपने, उसकी मेहनत और उसके आत्मविश्वास का प्रतीक होता है। हर व्यापारी की चाहत होती...

Read more
surya amrit dhoop

सूर्य अमृत धूप – उपयोग करने की विधि, अद्भुत लाभ...

प्राचीन भारतीय संस्कृति में सूर्य को 'प्रत्यक्ष देवता' माना गया है—एक ऐसा देवता जो हमें साक्षात दिखाई देता है और जिसके बिना पृथ्वी पर जीवन की कल्पना भी असंभव है।...

Read more
बुध की महादशा क्या है? अंतर्दशा, लक्षण, महत्व और लाल किताब उपाय

बुध की महादशा क्या है? अंतर्दशा, लक्षण, महत्व और लाल...

वैदिक ज्योतिष में विंशोत्तरी दशा पद्धति का विशेष महत्व है। यह माना जाता है कि हमारे जीवन की दिशा और दशा, ग्रहों की महादशाओं द्वारा निर्धारित होती है। इन सभी...

Read more
बृहस्पति की महादशा क्या है? अंतर्दशा, लक्षण, महत्व और लाल किताब उपाय

बृहस्पति की महादशा क्या है? अंतर्दशा, लक्षण, महत्व और लाल...

भारतीय वैदिक ज्योतिष में ग्रहों की दशाओं का विशेष महत्व है, और इनमें बृहस्पति (Jupiter) यानी 'गुरु' की महादशा को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। गुरु को 'आकाश तत्व' का...

Read more
jupiter mahadasha

Jupiter Mahadasha: Meaning, Effects, Antardasha, Importance, and Effective Lal Kitab...

Jupiter Mahadasha lasts for sixteen years, and for many people, this phase becomes a turning point in how they see life,...

Read more
mars mahadasha

Mars Mahadasha: Meaning, Significance, Antardashas & Effective Lal Kitab Remedies

Mars Mahadasha is the kind of phase where life doesn’t stay “slow” for long; it always suddenly picks up speed. You...

Read more
mercury mahadasha

Mercury Mahadasha: Meaning, Effects, Antardasha , Importance, and Effective Lal...

In astrology, Mercury Mahadasha is not just a planetary period; it is a phase that reshapes how a person thinks, acts, and experiences life. Among all planetary Mahadashas, Mercury Mahadasha...

Read more
Ketu Mahadasha

Ketu Mahadasha: Meaning, Effects, Antardasha, Importance, and Effective Lal Kitab...

In astrology, Ketu represents spirituality, detachment, and sudden changes. His lessons aren't always comfortable, but they're essential for your soul's growth. Where other planets give, Ketu takes away, not to...

Read more