नवरात्रि के छठे दिन करें माँ कात्यायनी की उपासना
माँ कात्यायनी कथा
पौराणिक कथा के अनुसार कात्य गोत्र में जन्में महर्षि कात्यायन की कोई संतान नहीं थी और उनकी मनोकामना थी की माँ भगवती उन्हें पुत्री रूप में प्राप्त हो इसलिए उन्होंने देवी पराम्बा की घोर तपस्या की और उनकी कड़ी तपस्या से प्रसन्न होकर देवी ने उनके घर पुत्री रूप में जन्म लेकर उनकी इस मनोकामना को पूर्ण किया माँ कात्यायनी बहुत ही गुणी कन्या थी, उन्होंने कई खूंखार राक्षसों के साथ महिषासुर नामक दानव का वध कर तीनो लोको को उसके अत्याचार से मुक्ति दिलाई थी।
पूजा विधि और महत्व
1. सुबह स्वच्छ होकर पीले या लाल रंग के वस्त्र धारण करें।
2. माता की मूर्ति का गंगाजल से अभिषेक करें।
3. उन्हें फूल, फल, अक्षत, कुमकुम अर्पित कर ज्योत जलाएं।
4. पूजा में शहद का प्रयोग जरूर करें जो की माँ को अत्यंत प्रिय है।
5. दुर्गा चालीसा का पाठ कर आरती करके माता को भोग लगाकर पूजा को पूर्ण करें।
माँ कात्यायनी की विधि-विधान से पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामना पूर्ण होती है और एक अद्भुत शक्ति का संचार होता है, माता की भक्ति से हर तरह का भय दूर होता है और कुवारी कन्याओं को सुयोग्य वर की प्राप्ति होती है। मान्यता है की माँ को पूजने से पिछले जन्म के पाप भी मिट जाते हैं।
स्तुति
या देवी सर्वभूतेषु माँ कात्यायनी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
आरती
जय जय अम्बे जय कात्यायनी। जय जग माता जग की महारानी॥
बैजनाथ स्थान तुम्हारा। वहावर दाती नाम पुकारा॥
कई नाम है कई धाम है। यह स्थान भी तो सुखधाम है॥
हर मन्दिर में ज्योत तुम्हारी। कही योगेश्वरी महिमा न्यारी॥
हर जगह उत्सव होते रहते। हर मन्दिर में भगत है कहते॥
कत्यानी रक्षक काया की। ग्रंथि काटे मोह माया की॥
झूठे मोह से छुडाने वाली। अपना नाम जपाने वाली॥
बृहस्पतिवार को पूजा करिए। ध्यान कात्यानी का धरिये॥
हर संकट को दूर करेगी। भंडारे भरपूर करेगी॥
जो भी माँ को भक्त पुकारे। कात्यायनी सब कष्ट निवारे॥
चैत्र नवरात्री के छठे दिवस की हमारी ओर से आप सभी को ढेरों शुभकामनाएं।
जय माँ कात्यायनी!
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