नवरात्रि के चौथे दिन कीजिए माँ कूष्माण्डा की अराधना।
माँ कूष्माण्डा से जुड़ी पौराणिक कथा
प्राचीन कथा के अनुसार जब अंतरिक्ष के सभी ग्रहों को अंधेरे ने घेर लिया था तब देवी कूष्माण्डा की मंद मुस्कान से पूरा ब्रह्माण्ड रोशन हो गया था, उनकी उपासना से व्यक्ति के शारीरिक और मानसिक विकार दूर हो जाते है। माना जाता है की शुद्ध ह्रदय से माता की अराधना करनी चाहिए वह आदिशक्ति स्वरुप है विशुद्ध ह्रदय उन्हें क्रोधित कर सकता है , माँ कूष्माण्डा की उपासना से भक्तों को उनके कष्टों से मुक्ति मिलती है इसलिए नवरात्रे के चौथे दिन उपवास रखकर माँ कूष्माण्डा की विधि-विधान से पूजा करना व्यक्ति के लिए शुभ फलदाई होता है।
स्तुति
या देवी सर्वभूतेषु माँ कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
माँ कुष्मांडा की आरती
कूष्मांडा जय जग सुखदानी।
मुझ पर दया करो महारानी॥
पिगंला ज्वालामुखी निराली।
शाकंबरी मां भोली भाली॥
लाखों नाम निराले तेरे।
भक्त कई मतवाले तेरे॥
भीमा पर्वत पर है डेरा।
स्वीकारो प्रणाम ये मेरा॥
सबकी सुनती हो जगदम्बे।
सुख पहुंचती हो मां अम्बे॥
तेरे दर्शन का मैं प्यासा।
पूर्ण कर दो मेरी आशा॥
मां के मन में ममता भारी।
क्यों ना सुनेगी अरज हमारी॥
तेरे दर पर किया है डेरा।
दूर करो मां संकट मेरा॥
मेरे कारज पूरे कर दो।
मेरे तुम भंडारे भर दो॥
तेरा दास तुझे ही ध्याए।
भक्त तेरे दर शीश झुकाए॥
चैत्र नवरात्री के चौथे दिवस की हमारी ओर से आप सभी को ढेरों शुभकामनाएं।
जय माँ कूष्माण्डा !
9999990522