नवरात्रि 2026 का तृतीय दिवस: माँ चंद्रघंटा की उपासना और घटस्थापना का शुभ मुहूर्त

नवरात्रि 2026 का तृतीय दिवस: माँ चंद्रघंटा की उपासना और घटस्थापना का शुभ मुहूर्त

अगर आप माँ चंद्रघंटा की तस्वीर को ध्यान से देखेंगे, तो आपको एक अद्भुत संतुलन दिखेगा। उनके माथे पर आधे चाँद (Crescent Moon) का निशान है जो एक 'घंटे' जैसा दिखता है, बस इसीलिए उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है।

सोचिए, एक तरफ उनके चेहरे पर चंद्रमा जैसी शीतलता और शांति है, तो दूसरी तरफ उनके दस हाथों में तलवार, त्रिशूल और धनुष जैसे अमोघ शस्त्र  हैं। यह हमें बताता है कि एक इंसान को स्वभाव से तो शांत रहना चाहिए, लेकिन अगर बात आत्मसम्मान या बुराई के खिलाफ लड़ने की आए, तो उसे 'शेर' की तरह तैयार भी रहना चाहिए। उनका वाहन 'सिंह' (Sher) इसी निडरता का प्रतीक है।

वर्ष 2026: कब और कैसे करें पूजा? (शुभ मुहूर्त)

21 मार्च 2026, शनिवार के दिन इस बार का तीसरा नवरात्र पड़ रहा है। शनिवार होने की वजह से इस दिन की अहमियत और बढ़ जाती है, खासकर उनके लिए जिनकी कुंडली में शनि का प्रभाव है।

खास जानकारी

समय और तारीख

पूजा की तारीख

21 मार्च 2026 (शनिवार)

तृतीया तिथि की शुरुआत

20 मार्च, रात 10:30 बजे से

पूजा के लिए बेस्ट टाइम

सुबह 06:15 से 08:30 (ब्रह्म मुहूर्त के बाद)

अभिजीत मुहूर्त

दोपहर 12:05 से 12:55 तक

माँ चंद्रघंटा का अलौकिक स्वरूप: प्रतीकों का गहरा अर्थ

माँ चंद्रघंटा का नाम सुनते ही मन में एक ऐसी छवि उभरती है जो तेजस्वी भी है और शीतलता प्रदान करने वाली भी। इनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र विराजमान है, इसीलिए इन्हें 'चंद्रघंटा' कहा जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इनके स्वरूप का हर अंग एक गहरा आध्यात्मिक संदेश देता है?

1. दस भुजाएँ: सर्वव्यापकता का प्रतीक

माँ की दस भुजाएँ दसों दिशाओं (पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण और उनके कोण) का प्रतिनिधित्व करती हैं। यह इस बात का संकेत है कि माँ प्रत्येक दिशा से अपने भक्तों की सदैव और तत्क्षण रक्षा करने के लिए तैयार रहती हैं। उनके हाथों में त्रिशूल, गदा, तलवार और धनुष जैसे अस्त्र हैं, जो नकारात्मक शक्तियों के विनाश के प्रतीक हैं। वहीं, कमल और कमंडलु उनकी सृजनात्मक और सात्विक शक्ति को दर्शाते हैं।

2. सिंह का वाहन: निर्भयता का संदेश

माँ सिंह (शेर) पर सवार हैं। सिंह राजसी ठाठ और निर्भयता का प्रतीक है। यह हमें संदेश देता है कि आध्यात्मिक पथ पर चलने वाले व्यक्ति को संसार के छोटे-मोटे भयों से ऊपर उठकर शेर की तरह साहसी होना चाहिए।

3. मस्तक पर अर्धचंद्र: मन की स्थिरता

ज्योतिष और अध्यात्म में चंद्रमा को 'मन' का कारक माना गया है। माँ के माथे पर आधा चंद्रमा यह दर्शाता है कि उन्होंने अपने मन पर पूर्ण विजय प्राप्त कर ली है। जब हम माँ की पूजा करते हैं, तो हमारे अशांत मन को भी वही शीतलता और स्थिरता प्राप्त होती है।

पौराणिक कथा: महिषासुर का संहार और 'घंटानाद' की शक्ति

पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक समय था जब महिषासुर नाम के राक्षस ने देवताओं का जीना मुश्किल कर दिया था। उसने स्वर्ग पर कब्ज़ा कर लिया और देवताओं को वहाँ से भगा दिया। तब माँ दुर्गा ने चंद्रघंटा का रूप लिया।

कहते हैं कि जब युद्ध छिड़ा, तो माँ ने अपने गले में लटके घंटे की ऐसी भीषण आवाज़ की, कि उस कंपन (Vibration) मात्र से ही आधे राक्षस मूर्छित हो गए। अंत में माँ ने महिषासुर का वध किया और देवताओं को उनका हक वापस दिलाया। माँ का यह दिव्य स्वरूप हमे साहस, शक्ति और धर्म के पथ पर अग्रसर होने के लिए प्रेरित करता है। 

घर पर पूजा की सरल विधि

अक्सर हमें ऐसा लगता है कि कहीं पूजा में हमसे कोई अपराध या गलती न हो जाए, जिसके फलस्वरूप गंभीर दंड न भोगना पड़े। किन्तु वास्तविकता इससे एकदम भिन्न है। ऐसा कहा जाता है कि श्रद्धा और भाव से यदि माँ को एक पुष्प भी अर्पित कर दिया जाए, तो वे उससे ही प्रसन्न हो जाती है।  तथापि शास्त्रसम्मत विधि से अनुष्ठान करने का अलग ही महत्व है।  शास्त्रसम्मत विधि से माँ चंद्रघंटा की आराधना करना के लिए नीचे दिए गए निर्देशों का पालन कर सकते हैं:

  1. पवित्रीकरण : सुबह जल्दी उठ कर स्नानादि के बाद शुद्ध वस्त्र धारण करें और माँ के सामने व्रत का संकल्प लें।  यदि संभव हो तो पीले (Yellow) या सुनहरे (Golden) रंग के वस्त्र धारण करें,  क्योंकि यह रंग माँ को अत्यंत  प्रिय है।

  2. पूजन स्थल एवं माँ का शृंगार: माँ की मूर्ति या फोटो के सामने घी का दीपक जलाएं। उन्हें लाल या चमेली के का फूल अर्पित करें ।

  3. नैवेद्य या भोग अर्पण: माँ चंद्रघंटा को दूध से बनी चीजें बहुत पसंद हैं। आप घर पर बनी केसर वाली खीर या दूध के पेड़े का भोग लगा सकते हैं। अगर आप वर्किंग हैं और समय कम है, तो आप बस दूध में थोड़ी चीनी और शहद मिलाकर भी अर्पित कर सकते हैं।

  4. मंत्रों का साथ: पूजा करते समय बस आँखें बंद करके इस मंत्र को दोहराएं: “ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः”

मंत्रों की शक्ति

माँ की कृपा प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित मंत्रों का प्रयोग करें:

  • बीज मंत्र: ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥

  • प्रार्थना मंत्र: > पिण्डज प्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
    प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥

मणिपुर चक्र और हमारा आत्मविश्वास

  • क्या आपने कभी गौर किया है कि जब हम डरे हुए होते हैं, तो हमारे पेट में एक अजीब सी हलचल होती है? योग विज्ञान कहता है कि हमारे शरीर का 'मणिपुर चक्र' (जो नाभि के पास होता है) साहस का केंद्र है। माँ चंद्रघंटा इसी चक्र को कंट्रोल करती हैं।

  • अगर आप उनकी पूजा करते हैं, तो धीरे-धीरे आपका आत्मविश्वास बढ़ता है। जो लोग स्टेज पर बोलने से डरते हैं या फैसले लेने में हिचकिचाते हैं, उनके लिए नवरात्रि का यह तीसरा दिन एक 'मेडिटेशन डे' जैसा होना चाहिए।

व्रत के दौरान क्या खाएं और क्या न खाएं?

अगर आप व्रत रख रहे हैं, तो शरीर का ध्यान रखना भी जरूरी है:

  • जरूर लें: नारियल पानी, मखाने, साबूदाना खिचड़ी और ताजे फल।

  • बचें: बहुत ज़्यादा तला-भुना खाने से बचें क्योंकि इससे आपको आलस आएगा और आप पूजा में मन नहीं लगा पाएंगे।

  • सबसे जरूरी: इस दिन किसी की बुराई न करें और अपनी जुबान पर काबू रखें। माँ की सौम्यता को अपने व्यवहार में लाएं।

निष्कर्ष 

माँ चंद्रघंटा हमें सिखाती हैं कि ज़िंदगी में शांति भी ज़रूरी है और ज़रूरत पड़ने पर साहस दिखाना भी। इस 21 मार्च को जब आप पूजा करें, तो माँ से बस यही मांगिएगा कि वे आपको हर डर से लड़ने की ताकत दें।

जय माता दी!

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. माँ चंद्रघंटा का स्वरूप हमें क्या सिखाता है?  

माँ चंद्रघंटा का स्वरूप हमें शांति, शक्ति और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है साथ ही ये साहस और शक्ति के मध्य संतुलन करना सिखाता है।

2. इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है ?

इस दिन पूजा का शुभ समय निम्नलिखित है:

  • तृतीया तिथि की शुरुआत: 20 मार्च, रात 10:30 बजे से
  • पूजा के लिए श्रेष्ठ समय: सुबह 06:15 से 08:30 (ब्रह्म मुहूर्त के बाद)
  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:05 से 12:55 तक

3. क्या शनिवार को माँ चंद्रघंटा की पूजा से शनि दोष कम होता है?

शास्त्रों के अनुसार, माँ दुर्गा की शरण में जाने वाले को कोई भी ग्रह परेशान नहीं करता। चूंकि 21 मार्च 2026 को शनिवार है, इसलिए माँ की पूजा करने से मानसिक तनाव कम होता है और शनि से जुड़ी बाधाएं दूर होने लगती हैं।

4. वर्किंग प्रोफेशनल्स के लिए कम समय में पूजा का तरीका क्या है?

अगर आप ऑफिस जाते हैं, तो सुबह बस 5 मिनट माँ के सामने बैठकर दीप जलाएं और 'ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः' का 11 बार जाप करें। शाम को घर आकर माँ को दूध का भोग लगाएं। याद रखिए, भक्ति समय की नहीं, समर्पण एवं भाव के अधीन है।

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