हिंदू धर्म में एकादशी को बहुत पवित्र माना गया है और उसमे भी अधिक मास में पड़ने वाली परमा एकादशी जो प्रत्येक तीन वर्ष के बाद आती है का विशेष महत्व है। मल-मास या अधिक मास भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है, इस माह में किया गया कोई वही व्रत, अनुष्ठान या दान सैकड़ों गुना फल देता है। इस दिन उपवास रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से वजपेय यज्ञ का फल प्राप्त होता है। यदि कोई व्यक्ति पूरे वर्ष एकदशी का व्रत नहीं रख सकता, तो इस दिन व्रत रखने मात्र से ही सभी एकादशियों का पुण्य मिल जाता है।
कर्म के प्रति निष्ठा और आचरण की शुद्धता साधु पुरुष के स्वभाव का मूल तत्व है, ये दोनों ही गुण परमा एकादशी का व्रत करने से स्वतः ही आ जाते हैं। व्रत के नियम मन, वाणी और कर्म से आत्म संयम और निष्ठा भाव की सिक्षा देते हैं। इस दिन भक्त सात्विक जीवन अपनाते हैं, किसी की बुराई नहीं करते, झूठ नहीं बोलते और जितना हो सके दूसरों की मदद करते हैं। सच कहूँ तो अगर यह सब कर लिया जाए तो समझो व्रत सफल हो गया।
परमा एकादशी व्रत 2026 तिथि
परमा एकादशी व्रत 2026 इस वर्ष गुरुवार, 11 जून 2026 को रखा जाएगा। पंचांग के अनुसार यह एकादशी ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष में पड़ेगी।
द्रिक पंचांग के अनुसार नई दिल्ली के लिए एकादशी तिथि 11 जून 2026 को सुबह 12:57 बजे (AM) शुरू होगी और 11 जून 2026 को रात 10:36 बजे (PM) समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर परमा एकादशी का व्रत 11 जून 2026 को मान्य रहेगा।
परमा एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त और पारण समय
परमा एकादशी व्रत का पारण अगले दिन द्वादशी तिथि में किया जाता है। व्रत को पूर्ण फलदायी बनाने के लिए पारण सही समय पर करना आवश्यक माना जाता है।
साल 2026 में परमा एकादशी व्रत का पारण 12 जून 2026 को सुबह 05:23 बजे से 08:10 बजे के बीच किया जाएगा। इस समय के दौरान भगवान विष्णु का स्मरण करके, पूजा पूर्ण करके और सात्विक भोजन ग्रहण करके व्रत का समापन करना शुभ माना जाएगा।
परमा एकादशी का महत्व
हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष स्थान है। प्रत्येक एकादशी भगवान विष्णु की पूजा के लिए समर्पित होती है, लेकिन परमा एकादशी को विशेष रूप से पुण्य और भक्ति से जुड़ा हुआ माना जाता है। इस दिन व्रत रखने से व्यक्ति के मन में संयम, धैर्य और आध्यात्मिक ऊर्जा का विकास होता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, परमा एकादशी का व्रत श्रद्धापूर्वक करने से जीवन में शुभता आती है और व्यक्ति को भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। यह व्रत केवल इच्छापूर्ति के लिए नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और सदाचार को अपनाने के लिए भी किया जाता है। इस दिन किया गया दान, जप और पूजन अत्यंत शुभ माना जाता है।
परमा एकादशी पूजा विधि
परमा एकादशी के दिन प्रातः जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद पूजा स्थान को साफ करके भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें और भगवान विष्णु से जीवन में शांति, सद्बुद्धि और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रार्थना करें।
पूजा में भगवान विष्णु को पीले फूल, तुलसी दल, चंदन, अक्षत, फल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें। तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय मानी जाती है, इसलिए पूजा में तुलसी दल अवश्य शामिल करना शुभ माना जाता है। इसके बाद “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें। यदि संभव हो तो विष्णु सहस्रनाम, विष्णु चालीसा या एकादशी व्रत कथा का पाठ भी करें।
पूजा के बाद जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, फल या दक्षिणा का दान करना शुभ माना जाता है। परमा एकादशी के दिन दान करते समय मन में विनम्रता और सेवा भाव होना चाहिए।
परमा एकादशी व्रत के नियम
परमा एकादशी व्रत में संयम और सात्विकता का विशेष महत्व है। इस दिन अन्न, चावल, तामसिक भोजन, लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा और नशे से दूर रहना चाहिए। व्रती अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार निर्जल, फलाहार या सात्विक उपवास कर सकते हैं। व्रत से एक दिन पूर्व भी साग, चना, और किसी अन्य के घर के भोजन का परहेज करना चाहिए, यदि संभव हो तो रात्रि भी भोजन न करें तो श्रेष्ठ
व्रत के दिन क्रोध, झूठ, कटु वाणी, चुगली और किसी का अपमान करने से बचना चाहिए। एकादशी व्रत केवल भोजन का त्याग नहीं है, बल्कि यह मन और व्यवहार को शुद्ध बनाने का अभ्यास है। इसलिए इस दिन शांत मन से भगवान विष्णु का स्मरण करना चाहिए और अच्छे कर्मों का संकल्प लेना चाहिए।
परमा एकादशी पर दान का महत्व
परमा एकादशी पर दान-पुण्य करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन जरूरतमंदों को भोजन, जल, वस्त्र, फल, अनाज या दक्षिणा का दान किया जा सकता है। दान करते समय अहंकार या दिखावा नहीं होना चाहिए। सच्चे मन से किया गया दान ही पुण्यदायी माना जाता है।
गर्मी के मौसम में जलदान का विशेष महत्व है। प्यासे लोगों के लिए पानी की व्यवस्था करना, जरूरतमंदों को भोजन कराना और सेवा भाव से सहायता करना इस दिन विशेष शुभ माना जाता है। परमा एकादशी हमें यह सिखाती है कि भक्ति तभी पूर्ण होती है, जब उसके साथ करुणा और सेवा भी जुड़ी हो।
परमा एकादशी का आध्यात्मिक संदेश
परमा एकादशी का मुख्य संदेश आत्मसंयम, भक्ति और सदाचार है। यह व्रत व्यक्ति को अपनी दिनचर्या, विचारों और कर्मों पर ध्यान देने की प्रेरणा देता है। आज के समय में जब लोग तनाव, भागदौड़ और अस्थिरता से घिरे हुए हैं, तब ऐसे व्रत मन को शांति और जीवन को संतुलन देने में सहायक माने जाते हैं।
इस दिन उपवास करने से व्यक्ति को अपने मन पर नियंत्रण रखने का अभ्यास मिलता है। पूजा और मंत्रजाप से मन में सकारात्मकता आती है। दान और सेवा से व्यक्ति में विनम्रता और करुणा का भाव बढ़ता है। इस प्रकार परमा एकादशी केवल धार्मिक व्रत नहीं, बल्कि जीवन को बेहतर बनाने का एक आध्यात्मिक अवसर भी है।
निष्कर्ष
परमा एकादशी व्रत 2026 गुरुवार, 11 जून 2026 को रखा जाएगा। यह दिन भगवान विष्णु की आराधना, व्रत, दान और आत्मचिंतन के लिए अत्यंत शुभ माना जाएगा। एकादशी तिथि 11 जून 2026 को रात 12:57 बजे से शुरू होकर रात 10:36 बजे तक रहेगी, जबकि व्रत का पारण 12 जून 2026 को सुबह 05:23 बजे से 08:10 बजे के बीच किया जाएगा।
आपके मन में उठने वाले कुछ आम सवाल-जवाब
1. परमा एकादशी व्रत 2026 कब है?
परमा एकादशी व्रत 2026 गुरुवार, 11 जून 2026 को रखा जाएगा। पंचांग के अनुसार यह एकादशी ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष में पड़ेगी।
2. परमा एकादशी 2026 की तिथि कब शुरू और समाप्त होगी?
द्रिक पंचांग के अनुसार नई दिल्ली के लिए एकादशी तिथि 11 जून 2026 को रात 12:57 बजे शुरू होगी और 11 जून 2026 को रात 10:36 बजे समाप्त होगी।
3. परमा एकादशी 2026 का पारण कब किया जाएगा?
परमा एकादशी व्रत का पारण 12 जून 2026 को सुबह 05:23 बजे से 08:10 बजे के बीच किया जाएगा।
4. परमा एकादशी पर क्या करना शुभ माना जाता है?
इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, व्रत, मंत्रजाप, तुलसी अर्पण, दान-पुण्य और सात्विक आचरण शुभ माना जाता है। जरूरतमंदों की सहायता करना भी इस दिन विशेष पुण्यकारी माना जाता है।
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