maa shailputri

नवरात्रि का पहला दिन: माँ शैलपुत्री की पूजा, मंत्र और शुभ रंग

माँ शैलपुत्री की आराधना के साथ नवरात्रि के पावन पर्व का शुभारंभ होता है। नौ दिनों तक चलने वाली इस भक्ति और साधना की शुरुआत माँ शैलपुत्री से होना अपने आप में खास माना जाता है। माँ शैलपुत्री को साहस,  शक्ति, पवित्रता और शांति तथा स्थिरता और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। इसलिए माँ शैलपुत्री का स्वरूप भी हमें जीवन में मुश्किल परिस्थितियों के बीच मजबूत बने रहने और हमें अपने विश्वास और हिम्मत पर दृढ़ रहने की प्रेरणा देती हैं।

माँ शैलपुत्री कौन हैं? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, मंत्र और शुभ रंग

माँ दुर्गा के नवस्वरूपों में माँ शैलपुत्री को माँ का प्रथम रूप माना गया है, इसीलिए नवरात्रि का प्रथम दिन माँ शैलपुत्री को समर्पित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माँ शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं और उन्हें माता पार्वती का स्वरूप माना जाता है। ‘शैलपुत्री’ नाम दो शब्दों से मिलकर बना है। ‘शैल’ का अर्थ पर्वत और ‘पुत्री’ का अर्थ बेटी होता है, यानी शैलपुत्री का अर्थ पर्वत की पुत्री है।

  • माँ शैलपुत्री पूजा तिथि: 11 अक्टूबर 2026 दिन रविवार
  • शुभ मुहूर्त: सुबह 06:32 बजे से सुबह 10:26 बजे तक
  • शुभ रंग: नारंगी।
  • प्रिय पुष्प: सफेद कनेर व गुड़हल।
  • पूजा मंत्र:  ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥

वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥

भक्तगण नवरात्रि के प्रथम दिन माता(माँ शैलपुत्री)  की आराधना करके अपने जीवन में सुख, शांति और शक्ति की कामना करते हैं।

माँ शैलपुत्री की पूजा विधि

नवरात्रि के प्रथम दिन माँ शैलपुत्री की पूजन विधि को हम निम्नलिखित बिन्दुओं के माध्यम से आसान भाषा में समझ सकते है।

  • सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें।
  • पूजा घर को साफ रखें।
  • माँ शैलपुत्री की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें।
  • कलश स्थापना की पूजा करें।
  • दीपक और धूप जलाएं।
  • माँ को फूल, अक्षत और कुमकुम अर्पित करें।
  • माँ शैलपुत्री की कथा पढ़ें।
  • उनके मंत्र का जाप करें।
  • अंत में आरती करके प्रसाद ग्रहण करें।

पूजन विधि अलग-अलग क्षेत्रों और परंपराओं में थोड़ी अलग हो सकती है। इसलिए अपनी पारिवारिक व क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार पूजन करना भी उचित माना जाता है।

माँ शैलपुत्री की कथा

माँ शैलपुत्री की कथा माता सती और भगवान शिव से सम्बन्धित है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता सती राजा दक्ष की पुत्री थीं, उन्होंने भगवान शिव को अपने पति के रूप में चुना लेकिन राजा दक्ष इस विवाह से खुश नहीं थे वे भगवान शिव को पसंद नहीं करते थे।

एक बार राजा दक्ष ने एक बड़े यज्ञ का आयोजन किया। उन्होंने सभी देवी-देवताओं को आमंत्रित किया, लेकिन भगवान शिव और माता सती को निमंत्रण नहीं दिया। माता सती अपने पिता के घर जाना चाहती थीं। भगवान शिव ने उन्हें समझाया कि जब उन्हें बुलाया ही नहीं गया है, तो वहां जाना ठीक नहीं होगा। लेकिन माता सती अपने परिवार से मिलने की इच्छा के कारण यज्ञ में चली गईं।

वहां राजा दक्ष ने भगवान शिव का अपमान किया और माता सती अपने पति भगवान शिव का यह अपमान सहन नहीं कर सकीं और दुख और क्रोध में उन्होंने यज्ञ की अग्नि में अपने प्राण त्याग दिए।

माता सती के प्राण त्यागने के पश्चात भगवान शिव बहुत दुखी हो गए और गहरे ध्यान में चले गए। इसके बाद माता सती ने पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री के रूप में जन्म लिया। इस जन्म में उनका नाम पार्वती और शैलपुत्री पड़ा। आगे चलकर उन्होंने फिर भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त किया।

यही कारण है कि माँ शैलपुत्री को माता सती और माता पार्वती का स्वरूप भी माना जाता है।

नवरात्रि के पहले दिन माँ शैलपुत्री की पूजा क्यों होती है?

नवरात्रि के नौ दिनों में माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है और माँ शैलपुत्री को पहला स्वरूप माना गया है। इसलिए नवरात्रि की शुरुआत उनकी पूजा से होती है।

इसे एक नई आध्यात्मिक शुरुआत के रूप में भी देखा जाता है। जैसे किसी भी मजबूत चीज की शुरुआत एक मजबूत आधार से होती है, वैसे ही नवरात्रि की साधना की शुरुआत माँ शैलपुत्री से की जाती है।

माँ शैलपुत्री को स्थिरता और आत्मबल से जोड़कर देखा जाता है। उनकी पूजा करते हुए भक्त अपने जीवन में शांति, साहस और सकारात्मकता बनाए रखने की प्रार्थना करते हैं।

माँ शैलपुत्री और मूलाधार चक्र

माँ शैलपुत्री का संबंध योग और आध्यात्मिक मान्यताओं में मूलाधार चक्र से बताया गया है। मूलाधार चक्र का प्रतीक लाल रंग है, जो नवरात्रि के पहले दिन माँ शैलपुत्री के सम्मान में पहने जाने वाले रंग से भी मेल खाता है। योगी और आध्यात्मिक साधक नवरात्रि के पहले दिन इस चक्र पर ध्यान करते हैं ताकि वे दैवीय शक्ति से जुड़ सकें और आत्म-साक्षात्कार की ओर चक्रों के माध्यम से अपनी ऊर्ध्वगामी यात्रा शुरू कर सकें। मूलाधार चक्र को शरीर और ऊर्जा का आधार माना जाता है। सरल शब्दों में समझें तो यह हमें जमीन से जुड़े रहने, स्थिर रहने और अपने अंदर सुरक्षा की भावना बनाए रखने का संदेश देता है।

यही कारण है कि नवरात्रि के प्रथम दिन माँ शैलपुत्री की पूजा को आध्यात्मिकता की पहली सीढ़ी माना जाता है। सर्वप्रथम स्वयं को भीतर से मजबूत और स्थिर बनाने की आवश्यकता है, इसके पश्चात ही आगे की साधना और आत्मिक विकास की ओर बढ़ने की बात कही जाती है।

निष्कर्ष

नवरात्रि का पहला दिन केवल नौ दिनों की पूजा की शुरुआत नहीं है, बल्कि खुद को भीतर से मजबूत बनाने की शुरुआत भी माना जा सकता है। माँ शैलपुत्री का पर्वत जैसा स्वरूप हमें स्थिर रहने, वृषभ हमें धैर्य रखने, त्रिशूल हमें साहस दिखाने और कमल हमें परिस्थितियों के बीच भी अपनी पवित्रता बनाए रखने की सीख देता है।

इस नवरात्रि जब आप माँ शैलपुत्री की पूजा करें, तो केवल अपनी इच्छाओं की पूर्ति की प्रार्थना न करें। माँ से इतना भी माँगें कि मुश्किल समय में आपका मन मजबूत रहे, सही रास्ते पर चलने का साहस मिले और जीवन में शांति बनी रहे। यही माँ शैलपुत्री की आराधना का सबसे सुंदर संदेश है।

Back to blog

Our Recent Blog

नवरात्रि का दूसरा दिन: माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा, मंत्र और शुभ रंग

नवरात्रि का दूसरा दिन: माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा, मंत्र और...

मां दुर्गा की नवशक्ति का दूसरा स्वरूप माँ ब्रह्मचारिणी का है, मां दुर्गा का यह स्वरूप भक्तों और सिद्धों को अनंत फल देने वाला है। माँ ब्रह्मचारिणी को तप, धैर्य,...

Read more
maa shailputri

नवरात्रि का पहला दिन: माँ शैलपुत्री की पूजा, मंत्र और...

माँ शैलपुत्री की आराधना के साथ नवरात्रि के पावन पर्व का शुभारंभ होता है। नौ दिनों तक चलने वाली इस भक्ति और साधना की शुरुआत माँ शैलपुत्री से होना अपने...

Read more
navratri 2026 dates and colours

Navratri 2026: 9 Colours, Dates & Goddess Names for Each...

Navratri is one of the most important Hindu festivals dedicated to Maa Durga and her nine divine forms. Sharad Navratri 2026 will begin on Sunday, October 11, and devotees will...

Read more
नवरात्रि 2026: पूजा विधि, 9 दिनों का महत्व, मां दुर्गा के 9 स्वरूप और शुभ उपाय

नवरात्रि 2026: पूजा विधि, 9 दिनों का महत्व, मां दुर्गा...

नवरात्रि नौ दिनों तक आयोजित होने वाला प्रमुख हिंदू पर्व है जो कि आदिशक्ति भगवती माँ दुर्गा व उनके नौ स्वरूपों को समर्पित है। यह पर्व स्त्री शक्ति व बुराई...

Read more
MAHADASHA AUR ANTARDASHA

महादशा और अंतरदशा: कुंडली में किसका प्रभाव अधिक होता है?

ज्योतिष में अक्सर लोगों का यह सवाल होता है कि महादशा ज्यादा प्रभावशाली होती है या अंतरदशा। कई बार कुंडली देखते समय भी यही उलझन होती है कि जीवन में...

Read more
vastu doshas

Vastu Dosha Guide: Types, Effects & Remedies

Some people may have the experience of feeling comfortable as soon as they enter someone's flat and being at ease, while for others, there is no explanation for these sensations...

Read more
east facing house vastu

East-Facing House Vastu Shastra: Benefits, Room Tips & Remedies

Ever since the beginning of time, the universe has favored one particular direction. An east-facing house, also known as the entrance to Surya (the God of the Sun), is the...

Read more
money plant vastu

Money Plant Vastu Direction: Where to Place It for Real...

There are countless people who have kept money plants in their houses for years, changing them from one corner to another without realizing that the money plant direction can be...

Read more
vastu tips for home entrance

Unlock Prosperity With These Vastu Tips for Home Entrances

If you've ever entered a house that precisely feels "correct," it is likely to do with the entrance. According to home entrance Vastu, a main door is not just a...

Read more
West facing house vastu

West-Facing House Vastu: Benefits, Room Tips & Remedies

Are you thinking about the idea of either constructing or purchasing a house that faces west? If you are, perhaps you are also puzzled whether going for it is a...

Read more