त्योहारों की बात आती है तो हम में से ज्यादातर लोग पूजा की सटीक तिथि और शास्त्रसम्मत विधि जानने का प्रयास करते हैं ताकि किसी भी तरह की त्रुटि से बच जा सके। पर सच पूछिए तो पार्वती जन्मोत्सव अपने आप में वह अभूतपूर्व उत्सव है जिसकी प्रतीक्षा हर कुंवारी कन्या को रहती है, क्योंकि ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव के साथ माता परतवाती की पूजा करने से मनवांछित वर की प्राप्ति होती है। ये दिन है ही कुछ ऐसा कि थोड़ा रुक कर, दिल से इसके पीछे की कहानी को महसूस करना चाहिए।
क्योंकि मां पार्वती की पूरी जिंदगी, उनका हर एक किस्सा, हमें कुछ न कुछ सिखा जाता है। उनका तप, उनका प्रेम, उनका धैर्य... सब कुछ बिल्कुल हमारी जिंदगी जैसा ही तो है, बस एक दिव्य स्तर पर। तो आइए, 2026 की पार्वती जयंती के बहाने, मां के इसी दिव्य और बेहद अपनेपन भरे रूप को समझने की कोशिश करते हैं।
पार्वती जयंती 2026 की तिथि
पार्वती जयंती 2026 21 जुलाई, मंगलवार को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार यह पर्व आषाढ़ शुक्ल अष्टमी तिथि पर पड़ता है। अष्टमी तिथि 21 जुलाई की सुबह शुरू होकर 22 जुलाई की सुबह तक रहेगी। इसलिए उदया तिथि के अनुसार पार्वती जयंती का पूजन 21 जुलाई को किया जाएगा।
इस दिन प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनना और श्रद्धा के साथ मां पार्वती का पूजन करना शुभ माना जाता है। अलग-अलग क्षेत्रों में पूजा की विधि और परंपराओं में थोड़ा अंतर हो सकता है, इसलिए स्थानीय परंपरा का ध्यान रखना भी उचित है।
माता पार्वती के जन्म की पौराणिक कथा
शिव पुराण के अनुसार, माता पार्वती अपने पूर्व जन्म में प्रजापति दक्ष की पुत्री ‘सती’ थीं और उनका विवाह भगवान शिव के साथ ही हुआ था। जब दक्ष ने अपने यज्ञ में भगवान शिव का अपमान किया, तो माता सती ने योगाग्नि में अपने प्राण त्याग दिए। सती के आत्मदाह के बाद भगवान शिव गहरे वैराग्य में चले गए और उन्होंने समाधि ले ली। उसी समय, ‘तारकासुर’ नामक एक भयंकर राक्षस ने तीनों लोकों में हाहाकार मचा दिया। तारकासुर को वरदान प्राप्त था कि उसका वध केवल भगवान शिव का पुत्र ही कर सकता है। चूंकि शिवजी समाधि में थे, इसलिए सभी देवता घबराकर आदिशक्ति की शरण में गए और उनसे अवतार लेने की प्रार्थना की। देवताओं की पुकार सुनकर माता आदिशक्ति ने पर्वतों के राजा ‘हिमालय‘ (हिमवान) और उनकी पत्नी ‘मैनावती‘ के घर पुत्री के रूप में जन्म लिया। पर्वतराज की पुत्री होने के कारण ही उनका नाम ‘पार्वती‘ (पर्वत की पुत्री) पड़ा। बड़ी होने पर माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए अन्न-जल त्याग कर वर्षों तक अत्यंत कठोर तपस्या की। उनकी इस निर्मल भक्ति और तप से प्रसन्न होकर अंततः भगवान शिव ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया और बाद में शिव-पार्वती के पुत्र ‘कार्तिकेय’ ने तारकासुर का वध किया।
पार्वती जयंती का महत्व
माता पार्वती को शक्ति और करुणा का अद्भुत संगम माना जाता है। वे एक ओर तपस्या और त्याग की प्रतीक हैं, वहीं दूसरी ओर प्रेम, परिवार और मातृत्व का सुंदर स्वरूप भी हैं। पार्वती जयंती का दिन भक्तों को धैर्य, निष्ठा और आत्मबल की प्रेरणा देता है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता ती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तप किया था। उनकी तपस्या यह बताती है कि जीवन में कोई भी श्रेष्ठ उद्देश्य बिना धैर्य और समर्पण के पूरा नहीं होता। यही कारण है कि विवाहित महिलाएं इस दिन वैवाहिक सुख और परिवार की समृद्धि के लिए पूजा करती हैं, जबकि अविवाहित कन्याएं योग्य जीवनसाथी की कामना से मां पार्वती की आराधना करती हैं।
यह पर्व केवल मनोकामना पूर्ति का दिन नहीं है। यह दिन यह भी सिखाता है कि जीवन में संयम, विश्वास और सही आचरण बहुत जरूरी हैं। मां पार्वती की पूजा से भक्तों को मन की शांति और आत्मविश्वास प्राप्त होता है।
माता पार्वती का स्वरूप
माता पार्वती को अनेक नामों से जाना जाता है। वह भगवान शिव की अर्धांगिनी और संपूर्ण ब्रह्मांड की माता (जगदंबा) हैं। वे गौरी, उमा, भवानी, शैलपुत्री, गिरिजा और अंबिका नाम से भी पूजी जाती हैं। उनका हर नाम उनके अलग गुण और स्वरूप को प्रकट करता है। गौरी रूप में वे सौम्यता और पवित्रता का प्रतीक हैं, जबकि दुर्गा और काली रूप में वे शक्ति और संरक्षण का संदेश देती हैं।
मां पार्वती का जीवन संतुलन का आदर्श प्रस्तुत करता है। वे एक तपस्विनी भी हैं, गृहस्थ जीवन की आदर्श देवी भी हैं और जगतजननी भी हैं। इसीलिए उनकी पूजा केवल स्त्रियां ही नहीं, बल्कि सभी भक्त श्रद्धा से करते हैं।
पार्वती जयंती की पूजा विधि
पार्वती जयंती के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। इसके बाद साफ वस्त्र पहनें और पूजा स्थान को स्वच्छ करें। एक चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर माता पार्वती और भगवान शिव का चित्र या प्रतिमा स्थापित करें।
सबसे पहले गणेश जी का स्मरण करें। इसके बाद माता पार्वती को जल, अक्षत, चंदन, कुमकुम, पुष्प, धूप, दीप और फल अर्पित करें। सुहागिन महिलाएं माता को श्रृंगार सामग्री जैसे सिंदूर, चूड़ी, बिंदी और चुनरी भी चढ़ा सकती हैं। भगवान शिव को बेलपत्र और जल अर्पित किया जा सकता है।पूजा के दौरान “ॐ पार्वत्यै नमः” या “ॐ उमायै नमः” मंत्र का जाप करें। शिव-पार्वती की आरती करें और परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करें। पूजा के बाद प्रसाद बांटें और जरूरतमंदों को भोजन या वस्त्र दान करें।
पार्वती जयंती पर क्या करें?
इस दिन माता पार्वती और भगवान शिव की संयुक्त पूजा करना शुभ माना जाता है। विवाहित महिलाएं अपने दांपत्य जीवन में प्रेम, सम्मान और स्थिरता की कामना कर सकती हैं। अविवाहित कन्याएं योग्य जीवनसाथी के लिए माता गौरी की पूजा कर सकती हैं।
घर में शांत और सकारात्मक वातावरण रखें। माता-पिता, पति-पत्नी और परिवार के सदस्यों के प्रति सम्मान का भाव रखें। इस दिन स्त्रियों, कन्याओं और जरूरतमंद लोगों की सहायता करना भी अच्छा माना जाता है।
यदि संभव हो तो शिव-पार्वती की कथा पढ़ें या सुनें। पूजा के साथ-साथ अपने व्यवहार को भी मधुर और संयमित रखें।
पार्वती जयंती पर क्या न करें?
इस दिन क्रोध, कटु वाणी और विवाद से बचना चाहिए। पूजा करते समय मन में ईर्ष्या, अहंकार या नकारात्मक भाव नहीं रखना चाहिए। धार्मिक अनुष्ठान को दिखावे का माध्यम न बनाएं।
तामसिक भोजन, नशा और अपवित्र आचरण से दूर रहना चाहिए। यदि व्रत रखा जा रहा है, तो अपनी सेहत का ध्यान रखें। स्वास्थ्य ठीक न हो तो कठोर उपवास के बजाय सरल पूजा और सात्विक भोजन के साथ भी श्रद्धा रखी जा सकती है।
आधुनिक जीवन में पार्वती जयंती का संदेश
आज के समय में रिश्तों में धैर्य और संवाद की बहुत आवश्यकता है। माता पार्वती का जीवन हमें सिखाता है कि प्रेम केवल भावना नहीं, बल्कि समझ, त्याग और सम्मान भी है। उनका तप हमें दृढ़ संकल्प का महत्व बताता है, और उनका मातृभाव करुणा तथा संरक्षण की प्रेरणा देता है।
पार्वती जयंती हमें यह याद दिलाती है कि परिवार की शांति केवल पूजा से नहीं, बल्कि अच्छे व्यवहार से भी आती है। यदि मन में सम्मान, धैर्य और प्रेम हो, तो घर का वातावरण अपने आप शुभ बनता है।
निष्कर्ष
पार्वती जयंती 2026 मंगलवार, 21 जुलाई 2026 को मनाई जाएगी। यह दिन माता पार्वती की पूजा, शिव-पार्वती की आराधना और परिवार की सुख-शांति की कामना के लिए विशेष है।
मां पार्वती शक्ति, प्रेम, तपस्या और मातृत्व का दिव्य रूप हैं। उनकी पूजा भक्तों को धैर्य, विश्वास और आत्मबल देती है। इस दिन केवल पूजा ही न करें, बल्कि जीवन में प्रेम, सम्मान और संयम को अपनाने का संकल्प भी लें। यही पार्वती जयंती का वास्तविक संदेश है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. पार्वती जयंती 2026 कब है?
पार्वती जयंती 2026 मंगलवार, 21 जुलाई 2026 को मनाई जाएगी। यह आषाढ़ शुक्ल अष्टमी तिथि पर पड़ती है।
2. पार्वती जयंती किस देवी को समर्पित है?
यह पर्व माता पार्वती को समर्पित है। उन्हें आदिशक्ति, गौरी, उमा और भगवान शिव की अर्धांगिनी के रूप में पूजा जाता है।
3. पार्वती जयंती पर क्या करना चाहिए?
इस दिन माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा, मंत्रजाप, आरती और दान करना शुभ माना जाता है। सुहागिन महिलाएं श्रृंगार सामग्री भी अर्पित कर सकती हैं।
4. पार्वती जयंती का मुख्य संदेश क्या है?
इस पर्व का मुख्य संदेश धैर्य, श्रद्धा, प्रेम, परिवार की एकता और आत्मबल है। माता पार्वती का जीवन तपस्या और समर्पण की प्रेरणा देता है।
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