Hariyali Teej 2026

हरियाली तीज 2026: जानें तिथि, महत्व, पूजा विधि और परंपराएं

श्रावण मास, जिसे हम आम बोलचाल में सावन कहते हैं, भारतीय जनमानस में एक गहरा और भावनात्मक स्थान रखता है। ग्रीष्म ऋतु की झुलसाने वाली धूप के बाद जब आकाश से जल की बूंदें धरती पर गिरती हैं, तो तपती धरा को न केवल शीतलता मिलती है, बल्कि प्रकृति का कण-कण एक नई ऊर्जा से स्पंदित हो उठता है।

इसी मखमली हरियाली और माटी की सोंधी सुगंध के बीच 'हरियाली तीज' का आगमन होता है। यह सिर्फ मौसम के बदलने का कोई साधारण उत्सव नहीं है। अगर हम इसके मूल में जाएं, तो यह पर्व एक स्त्री के अपने वैवाहिक जीवन के प्रति समर्पण, अखंड सुहाग की कामना और माता पार्वती की उस कठोर तपस्या का सजीव प्रमाण है, जिसने स्वयं महादेव को पिघला दिया था। 

हरियाली तीज 2026: सटीक तिथि और पंचांग का विवरण

अगर हम वर्ष 2026 के पंचांग और तिथियों की बात करें, तो इस बार यह पावन अवसर 15 अगस्त, दिन शनिवार को पड़ रहा है। सनातन धर्म की मान्यताओं के अनुसार, श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरियाली तीज मनाने का विधान है।

पंचांग की बारीक गणनाओं, विशेषकर नई दिल्ली के समयानुसार यदि हम गौर करें, तो तृतीया तिथि का असल आरंभ 14 अगस्त 2026 की शाम 18 बजकर 48 मिनट से ही हो जाएगा। यह तिथि अगले दिन यानी 15 अगस्त की शाम 17 बजकर 30 मिनट तक मान्य रहेगी। चूँकि हमारे शास्त्रों और परंपराओं में उदया तिथि (जिस तिथि में सूर्योदय होता है) को ही मुख्य माना गया है, इसलिए व्रत, स्नान-दान और पूजा-पाठ से जुड़े सभी मंगल कार्य 15 अगस्त को ही संपन्न किए जाएंगे।

पर्व का पौराणिक और पारिवारिक महत्व

हरियाली तीज की जड़ें हमारी पौराणिक कथाओं में बहुत गहराई तक पैठी हुई हैं। इसका सीधा नाता भगवान शिव और माता पार्वती के उस पुनर्मिलन से है, जो त्याग, तपस्या और निस्वार्थ प्रेम की पराकाष्ठा है। मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शंकर को अपने जीवनसाथी के रूप में प्राप्त करने का जो संकल्प लिया था, वह अत्यंत दुर्गम था। उन्होंने अन्न और जल का पूर्ण रूप से त्याग कर दिया और हिमालय की वादियों में वर्षों तक कठोर तपस्या की। 

अंततः उनके धैर्य की विजय हुई। सावन महीने की इसी शुक्ल तृतीया के दिन महादेव ने उनकी निष्ठा को स्वीकार करते हुए उन्हें अपनी अर्धांगिनी का स्थान दिया। यही कारण है कि आज की इस आधुनिक जीवनशैली में भी यह त्योहार रिश्तों में आपसी भरोसे, धैर्य और एक-दूसरे के प्रति सम्मान का प्रतीक बना हुआ है। विवाहित महिलाएं इसी व्रत के माध्यम से अपने पति की दीर्घायु और घर-परिवार में सुख-शांति की प्रार्थना करती हैं। 

वहीं, कुंवारी कन्याएं भी इसी आशा के साथ शिव-गौरी की आराधना करती हैं कि उन्हें एक सुयोग्य और समझदार जीवनसाथी की प्राप्ति हो। प्रकृति के नजरिए से देखें तो यह पर्व हमें यह संदेश देता है कि जिस तरह बारिश मुरझाए हुए पेड़ों को नया जीवन बख्शती है, ठीक वैसे ही विश्वास और प्रेम हमारे उलझे हुए पारिवारिक रिश्तों को भी फिर से हरा-भरा कर सकते हैं।

सिंधारा की मिठास और सुहाग के श्रृंगार की परंपरा

इस पर्व के साथ 'सिंधारा' नाम की एक भावनात्मक रस्म भी जुड़ी है। सावन के इस महीने में विवाहित कन्याओं के मायके की तरफ से उनके ससुराल के लिए ढेर सारे उपहार भेजे जाते हैं। इन उपहारों में मुख्य रूप से नए परिधान, घेवर जैसी पारंपरिक मिठाइयां, सुहाग का सामान, कांच की चूड़ियां और मेहंदी शामिल होती है। इसे महज एक रस्म या लेन-देन समझना भूल होगी। 

दरअसल, यह एक पिता और भाई का अपनी बेटी या बहन के प्रति वह निर्मल प्रेम है, जो यह दर्शाता है कि विवाह के बाद भी उसका अपने मायके से नाता उतना ही मजबूत है। यह उसके सुखी और अखंड सौभाग्य के लिए दिया गया एक आशीर्वाद है। इसके अलावा, तीज पर हरे रंग के वस्त्र और आभूषण पहनने का एक खास चलन है। हरा रंग यूं ही नहीं चुना गया; यह रंग सावन की उस ताज़गी और संपन्नता को दर्शाता है, जो मनुष्य के जीवन में हमेशा बनी रहनी चाहिए। हाथों में रची गाढ़ी मेहंदी और सखियों के साथ गाए जाने वाले पारंपरिक लोकगीत इस दिन के उत्साह को कई गुना बढ़ा देते हैं।

शास्त्र सम्मत पूजा विधि

हरियाली तीज पर पूजा का विधान बहुत ही सादगी और शुद्धता से परिपूर्ण है।

  1. इस दिन व्रती महिलाओं को प्रातः काल सूर्योदय से पूर्व ही उठकर स्नानादि से निवृत्त हो जाना चाहिए।
  2. इसके पश्चात साफ परिधान धारण कर मन में शिव-गौरी के ध्यान और व्रत का संकल्प लेना चाहिए।
  3. घर के जिस हिस्से में आप पूजा करने वाले हैं, उसे गंगाजल से पवित्र कर लें।
  4. एक लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान शिव, माता पार्वती और श्री गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें। किसी भी शुभ कार्य से पहले गणेश जी का स्मरण करना अनिवार्य बताया गया है। 
  5. तत्पश्चात, भोलेनाथ और माता पार्वती को शुद्ध जल, अक्षत (साबुत चावल), ताजे फूल, बेलपत्र, दीप, ऋतुफल और नैवेद्य अर्पित किए जाते हैं। माता गौरी को सुहाग की निशानियां—जैसे सिंदूर, बिंदी, हरी चूड़ियां, आलता, मेहंदी और चुनरी—चढ़ाना इस पूजा का सबसे अहम हिस्सा माना गया है। 
  6. पूरी श्रद्धा के साथ हरियाली तीज की व्रत कथा का वाचन या श्रवण करें, क्योंकि कथा सुने बिना इस व्रत को पूर्ण नहीं माना जाता। पूजा के अंत में आरती करके अपने दांपत्य जीवन में सुख, शांति और सामंजस्य की प्रार्थना करें।

क्या करें और किन बातों से बचें?

व्रत का असल अर्थ सिर्फ भूखे रहना नहीं है, बल्कि अपने मन, विचारों और इंद्रियों पर संयम रखना होता है। इसलिए इस पावन दिन घर का वातावरण जितना संभव हो सके, उतना सकारात्मक और सौहार्दपूर्ण बनाए रखें। घर की बुजुर्ग महिलाओं का चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लेना बिल्कुल न भूलें। यदि सामर्थ्य हो, तो किसी जरूरतमंद महिला को अन्न या सुहाग की सामग्री दान करें, शास्त्रों में इसका बड़ा ही शुभ फल बताया गया है। 

इसके विपरीत, व्रत के दौरान क्रोध करने, किसी का अपमान करने या कटु शब्द बोलने से पूरी तरह बचना चाहिए। यदि आपका स्वास्थ्य अनुमति न दे, तो जबरन निर्जला व्रत करने की कोई आवश्यकता नहीं है; ईश्वर भावों के भूखे हैं, शरीर को कष्ट देने के नहीं। आप फलाहार करके भी इस व्रत को पूर्ण कर सकती हैं। त्योहारों को महज रीति-रिवाजों के बोझ तले न दबने दें। 

निष्कर्ष

जब बागों में झूले पड़ जाते हैं, पेड़ों की डालियां नई कोपलों से लद जाती हैं और हवाओं में एक मीठी सी ठंडक महसूस होने लगती है, तब हरियाली तीज का यह उल्लास अपने चरम पर होता है। इस खास दिन सुहागिन महिलाएं पूरे भक्ति-भाव से निर्जला व्रत का पालन करती हैं, सोलह श्रृंगार से सजती हैं, अपनी सखियों के संग मल्हार गाती हैं और शिव-शक्ति की उपासना कर अपने सुखी दांपत्य की नींव को और अधिक मजबूत करती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न: हरियाली तीज 2026 में किस तारीख को मनाई जाएगी? 

वर्ष 2026 में यह पावन पर्व 15 अगस्त, दिन शनिवार को संपूर्ण भारत में अत्यंत हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा।

प्रश्न: पंचांग के अनुसार यह त्योहार किस तिथि को आता है?

भारतीय सनातन पंचांग की गणना के अनुसार, प्रतिवर्ष श्रावण (सावन) मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरियाली तीज का आयोजन होता है।

प्रश्न: इस व्रत में मुख्य रूप से किनकी आराधना होती है? 

अखंड सौभाग्य की कामना के लिए इस दिन मुख्य रूप से भगवान शिव, माता पार्वती और प्रथम पूज्य श्री गणेश जी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।

प्रश्न: हरियाली तीज पर महिलाएं विशेष रूप से क्या करती हैं?

महिलाएं इस दिन निर्जला व्रत रखती हैं, हाथों में मेहंदी रचाती हैं, हरे रंग के वस्त्र पहनकर सोलह श्रृंगार करती हैं, सखियों के साथ झूला झूलती हैं और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए शिव-पार्वती की पूजा करती हैं।

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