नवरात्रि 2026 का छठा दिवस: माँ कात्यायनी की उपासना और घटस्थापना का शुभ मुहूर्त

नवरात्रि 2026 का छठा दिवस: माँ कात्यायनी की उपासना और घटस्थापना का शुभ मुहूर्त

वसंत की बहार में जब चैत्र नवरात्रि आती है तो दिल में एक अलग ही उमंग भर जाती है। साल 2026 में यह पावन पर्व 19 मार्च गुरुवार से शुरू हो रहा है और 27 मार्च शुक्रवार को राम नवमी के साथ समाप्त होगा। पूरे नौ दिनों में हर दिन मां दुर्गा का एक नया स्वरूप हमारी पूजा का केंद्र होता है। लेकिन छठा दिन, यानी 24 मार्च 2026 मंगलवार सबसे खास है – जब हम मां कात्यायनी की आराधना करेंगे ।

अगर आप भी उन भक्तों में शामिल हैं जो नवरात्रि में मां के हर रूप को दिल से पुकारते हैं, तो यह ब्लॉग आपके लिए ही लिखा गया है। आज मैं आपको मां कात्यायनी के दिव्य स्वरूप, उनकी रोचक कथा, 2026 की सही तिथि पर पूजा की विस्तृत विधि, मंत्र, आरती, भोग, व्रत के नियम और आज के समय में उनकी प्रासंगिकता के बारे में इतना विस्तार से बताऊंगा कि पढ़ते-पढ़ते आप महसूस करेंगे जैसे मां की तलवार आपके सारे डर को काट रही है।

मां कात्यायनी कौन हैं? 

मां दुर्गा के छठे स्वरूप को कात्यायनी कहा जाता है। “कात्यायन” ऋषि की तपस्या से प्रकट होने के कारण उनका यह नाम पड़ा। वे अत्यंत तेजस्वी और योद्धा रूप में दिखाई देती हैं। सिंह पर सवार रहती हैं – सिंह शक्ति और साहस का प्रतीक है। उनकी चार भुजाएं हैं: दाएं ऊपरी हाथ में तलवार, दाएं निचले हाथ में वरद मुद्रा (आशीर्वाद देने वाली), बाएं ऊपरी हाथ में त्रिशूल और बाएं निचले हाथ में कमल का फूल।

उनका संबंध रंग लाल से माना जाता है, जो ऊर्जा, साहस और विजय का प्रतीक है। 2026 के चैत्र नवरात्रि में इस दिन लाल रंग अवश्य धारण करें। लाल साड़ी, कुर्ता या दुपट्टा पहनकर पूजा करने से मां की कृपा तुरंत मिलती है। उनका स्वरूप देखकर भय दूर होता है – वे न सिर्फ शत्रुओं का संहार करती हैं बल्कि भक्तों को भी ओज और तेज प्रदान कर उनकी 

हर मुश्किल को आसान करतीं हैं।

पौराणिक कथा: कैसे हुई मां कात्यायनी की उत्पत्ति?

पुराणों में विस्तार से कथा मिलती है। प्राचीन काल में महिषासुर नाम का राक्षस देवताओं को परेशान कर रहा था। देवताओं ने ब्रह्मा, विष्णु और शिव से मदद मांगी। तीनों देवताओं की शक्ति से एक दिव्य कन्या प्रकट हुई। लेकिन इस कन्या को बनाने में ऋषि कात्यायन की भी बड़ी भूमिका थी। उन्होंने सालों तक कठोर तपस्या की और मां दुर्गा को अपनी पुत्री रूप में मांगा।

मां ने कात्यायन ऋषि के आश्रम में जन्म लिया और उनका नाम कात्यायनी पड़ा। बड़े होकर उन्होंने महिषासुर से नौ दिनों तक युद्ध किया और अंत में अपना छठा रूप दिखाते हुए राक्षस का वध कर दिया। इस कथा से सीख मिलती है कि मां का रूप कितना बहुरूपी है – कभी ममता भरी मां तो कभी तलवार लिए योद्धा।

आज भी जब कोई समस्या, शत्रुता या अंदर का डर सताता है, तब मां कात्यायनी याद आती हैं। मेरे एक पड़ोसी ने बताया कि उनकी बेटी की शादी में बहुत रुकावटें आ रही थीं। उन्होंने सिर्फ इस दिन विशेष पूजा की और मां से प्रार्थना की – अगले महीने रिश्ता पक्का हो गया। ऐसी सच्ची कहानियां भक्तों की जिंदगी में रोज होती हैं।

मां कात्यायनी पूजा का गहरा महत्व

चैत्र नवरात्रि हिंदू नववर्ष की शुरुआत होती है। 24 मार्च 2026 को षष्ठी तिथि है, जब साधक का मन मणिपुर चक्र (नाभि के पास) में जागृत होता है। इस चक्र से साहस, आत्मविश्वास और इच्छाशक्ति आती है।

मां कात्यायनी की पूजा से:

  • अविवाहित लड़कियों को अच्छा वर मिलता है

  • शत्रु नाश होता है

  • नौकरी-व्यापार में सफलता

  • स्वास्थ्य में सुधार

  • मन में छिपा डर दूर होता है

खासकर जो लोग मुकदमे, प्रतिस्पर्धा या किसी बाधा से जूझ रहे हैं, उनके लिए यह दिन स्वर्णिम है। 51 शक्तिपीठों में से एक माँ का विश्व प्रसिद्ध मंदिर मथुरा, उत्तर प्रदेश में अवस्थित है, जहां देश-दुनिया से लोग इस दिन दर्शन करने आते हैं।  इसके अतिरिक्त देश के अन्य बड़े-बड़े शहरों में भी इस दिन विशेष हवन और सामूहिक आरती होती है। आप घर पर भी परिवार के साथ बैठकर पूजा कर सकते हैं।

मां कात्यायनी पूजा की स्टेप-बाय-स्टेप विधि

पूजा ब्रह्म मुहूर्त में शुरू करें। घर साफ-सुथरा रखें, पूजा स्थल पर लाल चादर बिछाएं।

जरूरी सामग्री:

  • मां कात्यायनी की मूर्ति या फोटो

  • लाल वस्त्र

  • लाल फूल (गुलाब, लाल कमल)

  • शहद (मुख्य भोग)

  • हलवा, पंचामृत, मिठाई

  • चंदन, रोली, अक्षत, धूप, घी का दीपक

  • तलवार या छोटा खड्ग (प्रतीकात्मक)

  • कलश, गंगाजल

पूजा की विधि:

  1. स्नान कर लाल कपड़े पहनें।

  2. चौकी पर मां की प्रतिमा स्थापित करें। गंगाजल छिड़ककर शुद्ध करें।

  3. कलश स्थापना, गणेश जी और नवग्रह की पूजा करें।

  4. संकल्प लें: “मां कात्यायनी, मुझे साहस, विजय और मनोकामना पूरी करो।”

  5. षोडशोपचार पूजा: आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, चंदन, पुष्प, धूप-दीप, नैवेद्य (शहद अवश्य चढ़ाएं), फल, आरती, प्रदक्षिणा।

  6. हवन करें – आहुति में लाल चंदन और शहद मिलाकर डालें।

  7. अंत में प्रसाद बांटें और ब्राह्मणों  को दान दें।

मंत्र जप:

  • मुख्य मंत्र: ॐ देवी कात्यायन्यै नमः – कम से कम 108 बार जपें।

  • ध्यान मंत्र: चतुर्भुजा सिंहस्था खड्गशूलवराभयकरा । कात्यायनी महामाया चंद्रार्धकृतशेखरा ॥

  • स्तोत्र: या देवी सर्वभूतेषु... (दुर्गा सप्तशती का छठा अध्याय विशेष रूप से पढ़ें)।

भोग: शहद, हलवा, पंचामृत, लाल मिठाई। शहद चढ़ाने से वाणी में मिठास और स्वास्थ्य अच्छा रहता है। शेष शहद परिवार में बांटें।

व्रत और नियम – कैसे रखें उपवास?

इस दिन फलाहार या एक समय लाल चावल, लाल दाल का भोजन कर सकते हैं। प्याज-लहसुन, मांसाहार से दूर रहें। जो पूरे नवरात्रि व्रत रख रहे हैं, वे खीर, फल, दही पर रहें। महिलाएं और लड़कियां विशेष रूप से इस दिन व्रत रखकर मां से वर मांगें – फल अवश्य मिलता है।

निष्कर्ष 

आजकल हर तरफ प्रतिस्पर्धा है – नौकरी, पढ़ाई, परिवार, समाज। लड़कियां करियर और शादी दोनों संभाल रही हैं। मां कात्यायनी का रूप ठीक वैसा ही है – निडर योद्धा। उनकी पूजा से आत्मविश्वास बढ़ता है, नकारात्मक लोग दूर होते हैं। व्यापारियों को शत्रु नाश और लाभ मिलता है।

मेरे एक मित्र की पत्नी को ऑफिस में बहुत परेशानी रहती थी। उन्होंने 2025 में इस दिन माँ कात्यायनी की विधिवत पूजा की – जिसके प्रभाव से उन्हे शीघ्र ही प्रमोशन मिल गया और अभी वे प्रसन्नता पूर्वक वहीं कार्यरत हैं। ये प्रसंग माँ की ममता का जीवंत उदाहरण है, जो हमारे मन में भक्ति के प्रति आस्था और विश्वास में और अधिक सुदृढ़ करता है।  

FAQs (सवाल-जवाब)

1. 2026 चैत्र नवरात्रि में मां कात्यायनी पूजा की सही तिथि और दिन क्या है?

24 मार्च 2026, मंगलवार को षष्ठी तिथि है। सुबह ब्रह्म मुहूर्त से पूजा शुरू करें।

2. मां कात्यायनी को सबसे अच्छा भोग क्या लगाना चाहिए और इसका कारण?

शहद मुख्य भोग है। यह मिठास, स्वास्थ्य और वाणी की शुद्धता का प्रतीक है। शहद चढ़ाने से मनोकामनाएं तेजी से पूरी होती हैं।

3. कात्यायनी पूजा से किन-किन वांछित कामनाओं की पूर्ति होती  हैं?

अविवाहितों को अच्छा वर, शत्रु नाश, करियर में तरक्की, साहस बढ़ना, स्वास्थ्य लाभ और परिवार में सुख-शांति।

4. क्या पुरुष, लड़कियां या व्यापारी भी इस पूजा कर सकते हैं?

हां, बिल्कुल! मां सबकी रक्षक हैं। लड़कियां वर प्राप्ति के लिए, पुरुष साहस के लिए और व्यापारी सफलता के लिए पूजा कर सकते हैं। पूरा परिवार साथ बैठकर करे तो और अच्छा।

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