ज्योतिष के लिए इतना ही कहूँगा कि जब आप इसे समझते हो ना, कि यह बहुत मुश्किल है। वास्तविकता में यह बहुत बड़ी गलती है। इसे सीखने का तरीका शायद किताबों में नहीं मिले। आपको किताबों में ज्ञान मिलता है, उसूल मिलते हैं, योग मिलते हैं, युक्तियाँ मिलती हैं। लेकिन सही मायने में ज्योतिष हमारे इस धरातल पर, हमारी इस धरा पर विराजमान है।
स्वभाव और ग्रहों का महत्व
हम किसी इंसान को देखकर ये सोचना शुरू कर दें कि इसका कौन सा ग्रह अच्छा है या बुरा है, तो उसके स्वभाव का ज्ञान होने लगता है। यानी आपको ग्रह के स्वभाव का ज्ञान होने लगता है। और अगर किसी पेड़-पौधे को देखकर ही हम ये सोचने लग जाएं कि इसके अंदर क्या गुण है और उस गुण के अनुसार कौन से ग्रह से संबंधित है, तो ज्योतिष विज्ञान अपने आप हमारे अंदर आने लगता है। और अगर हम इंसान के कर्म को समझने लग जाएं, तो ये साफ पता चलने लगता है कि कौन से ग्रह से संबंधित ये काम है और यह आदमी किस काम के लिए पैदा हुआ है। क्योंकि इस धरती पर आपने एक कहावत जरूर सुनी होगी कि ऊपर वाले की मर्जी के बिना धरती पर पत्ता भी नहीं हिलता।
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ऊपर परमात्मा ने इन ग्रहों को यह सारा काम सौंपकर भोलेनाथ कैलाश पर्वत पर और विष्णु जी क्षीर सागर में वहाँ पर बैठकर इन ग्रहों की करनी देख रहे हैं। भोलेनाथ कहते हैं, "तुम करते जाओ और मैं इनको अपनी शरण में लेता चला जाता हूँ," और बार-बार सबको धरती पर लाना भी तो है। तो सही मायने में जो हमारे परमात्मा महसूस करते हैं, वही हमारे अंदर है। उन्होंने ये सारी ताकत ग्रहों को दी है, तो इसलिए अपने परमात्मा का सम्मान करते हुए हमें ग्रहों को जरूर मानना चाहिए। आप सब लोग, जितने ज्योतिषी हैं, सही मायने में परमात्मा के भेजे हुए वो नुमाइंदे हैं जो ब्रह्मऋषि की तरह इस धरती से दुख खत्म करना चाहते हैं।
तो हम चाहे जिस मर्जी जात - विरादरी से कुछ नहीं, हम सनातनी हैं और जो ज्योतिष सीख रहे हैं, मैं इतना ही कहूंगा, बेशक भूले-भटके कई जन्मों से इधर आए, लेकिन हैं तो ब्रह्मा जी की औलादें ही। तो सारे ब्रह्मा जी की औलादों को मेरा प्रणाम।
किसी भी ग्रह को ठीक करना कोई मुश्किल नहीं है। और जन्म कुंडली में कुछ भी न हो तो दो-तीन ग्रह तो खराब हो ही जाते हैं, वैदिक के अनुसार निकालो या लाल किताब के अनुसार निकालो, कैसे भी निकालो। और खराब ग्रह का पता लगाना कोई मुश्किल काम नहीं है। और यह जो मैं बताने जा रहा हूं, अगर आपने इतनी-सी चीज पकड़ ली, तो आपको कुंडली में से ग्रह को शुभ और अशुभ जांचने की जरूरत नहीं पड़ेगी। कैसे?
अशुभ ग्रहों की पहचान कैसे करें?
अगर किसी के मुंह में पानी बहुत आता है, पिता के सुख में थोड़ी दिक्कत है या पिता की कमाई में बहुत दिक्कत है और आदमी अगर जल्दी चिढ़ जाता है, तो समझ लीजिए उसका सूर्य खराब है। और अगर माँ को बहुत तकलीफें मिली हैं, पिता से ज्यादा जिम्मेदारियाँ माँ को उठानी पड़ी हैं और पिता ने विदेशों में रहकर काम किया है और माँ ने अपना सब कुछ न्योछावर करके बच्चे पाले हैं, उसके बावजूद प्रॉपर्टी और पैसे की अगर कमी रही है और माँ ने ससुराल वालों से गालियाँ भी बहुत सुनी हैं, समझ लो आपकी जन्म कुंडली का चंद्रमा खराब है। मंगल, अगर आपके अंदर जलन की भावना आती है, किसी की भी तरक्की देखकर अगर आप चिढ़ते हैं और धीरे-धीरे करके आँखें कमजोर हो रही हैं, पेट में गैस, एसिडिटी, कब्ज की दिक्कत हो रही है, समझ लीजिए मंगल खराब है।
ऐसी व्यवस्था में इंसान या तो बिल्कुल झुककर चलता है या बिल्कुल अकड़कर चलता है, और ये जो अकड़े हुए मंगल वाले हैं, ये ज्यादा खराब कर जाते हैं। इनको जीवन में शारीरिक कष्ट भी मिलते हैं और पैसा नहीं मिलता। और जैसे-जैसे आप अपने अंदर से जलन की भावना खत्म करते चले जाएंगे, किसी की भी तरक्की को देखकर, नाम को देखकर, किसी के काम को देखकर आपको खुशी का आभास होगा। और पहले आगे बढ़कर उसे बधाई देंगे और उसका साथ देने लगेंगे, तो आपका मंगल अच्छा हो जाएगा।
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कुंडली में मंगल ग्रह का महत्व
आपको मैं एक बात बता दूँ, लाल किताब के अंदर साफ तौर पर लिखा हुआ है कि हमारे पास जितना भी धन आना है, जो भी इंसान बहुत अमीर बनना चाहता है, उसका जन्म कुंडली के अंदर मंगल शुभ होना चाहिए। और अगर किसी का मंगल शुभ नहीं होगा, तो ऐसे इंसान की नेगेटिव सोच उसके दोस्तों को काट-काट कर दूर फेंकती रहेगी। जिसकी वजह से, जब उसे उन दोस्तों की जरूरत पड़ेगी, उस वक्त वे उसके पास नहीं होंगे, जिसके कारण उसके काम अधूरे रह जाएंगे। और जिंदगी में, आपने कुछ भी करना हो, सुख-दुख का मामला हो, कमाई का मामला हो, कहीं से स्पोर्ट लेनी हो, कुछ भी करना हो, आपको मंगल, यानी यार, दोस्त और भाइयों की जरूरत पड़ती है। और इसलिए, ये जो पॉजिटिव थॉट रखने वाले लोग होते हैं, इनको गैस एसिडिटी भी ज्यादा कभी नहीं होती।
इनकी कमर और पैरों में कभी दर्द नहीं होता, ज्यादा बुढ़ापे के साथ थोड़ा हो जाए, बात अलग है। लेकिन इनके कमर और पैरों में कभी दर्द नहीं होता, गैस और एसिडिटी नहीं होती, और पॉजिटिव रहने के कारण हमारे अंदर के जो करोड़ों जीव हैं, जो हमारे अंदर ये सेल्स हैं, ये अपने आप में एक-एक इंसान हैं। तो जब आप पॉजिटिव रहते हो, खुश रहते हो, तो ये भी खुश रहते हैं। और ये खुश रहते हैं तो अंदर यह धमा-चौकड़ी नहीं मचाते, लड़ते नहीं हैं, टकराते नहीं हैं एक-दूसरे से। और जब ये आपके शरीर को टकराएंगे नहीं, अंदर बीमारियाँ नहीं पैदा होंगी। इसको बोलते हैं मंगल की ताकत।
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कुंडली में बुध और बृहस्पति का महत्व
बीमार होने का कारण क्या है? अंदर आपके जो बहुत सारे जीव हैं, जब आप इन्हें भूखा रखते हैं, सोच-समझकर खाते हैं, तो यह कहते हैं कि इस पागल को तो दुरुस्त करना पड़ेगा। फिर वे अपना रूप दिखाते हैं और वहाँ से बीमारियाँ शुरू होती हैं। इसीलिए बेटा, हफ्ते में एक दिन व्रत करना जायज है। अपने इन किटाणुओं को समझा कर रखिए और बाकी के छह दिन दबा के खाना बहुत जरूरी है, वरना याददाश्त भी चली जाती है और बृहस्पति भी चले जाते हैं।
और हमारे ऋषि-मुनियों ने भी ढूंढा बुध, जिसकी भी बहन और बुआ शादी के बाद दुख पाती हैं और शादी से पहले जिद्दी होती हैं और शादी के बाद वो दुख पाती हैं या जिसकी नसों के अंदर दिक्कत हो या जिसके अंदर बहुत ज्यादा चापलूसीपन हो कि किसी के भी कहने पर दिन को रात और रात को दिन बोल दे, ऐसे इंसान का बुध खराब हो जाता है। ऐसा इंसान नौकरी के लिए पैदा होता है, जिंदगी में कभी बिजनेस नहीं करता। तो ऐसी अवस्था के अंदर क्या करना चाहिए? ऐसी अवस्था के अंदर उसको थोड़ा धीर-गंभीर होना चाहिए। हर वक्त लाल किताब में एक शब्द आता है - मखौलिया। मतलब हर वक्त ही हंसने-गाने वाला, हर वक्त ही चापलूसी करने वाला। ये स्वभाव को छोड़ना चाहिए और जिसका यह स्वभाव छूटता है वो बिजनेसमैन बनता है, चाहे उसे एक दुकानदारी चलानी हो या बड़ी-बड़ी ट्रेडिंग करनी हो, वो इंसान जरूर बिजनेसमैन बन जाता है। और इसके साथ में दुर्गा पूजा, यानी कन्या पूजन का एक भी मौका न छोड़े, अगर आदमी ऐसा करे तो वो इंसान का बुध जरूर अच्छा होता है।
कुंडली में बृहस्पति और शुक्र का संबंध
बृहस्पति, अब जो मैं आपको बताने जा रहा हूँ, यह शायद पूरी सृष्टि का आधार है। बृहस्पति यानी 3 नंबर, और शुक्र यानी 6 नंबर। अगर हम विज्ञान की बात करें, तो विज्ञान के अंदर 9 नंबर किसी भी चीज का आधार नहीं है। विज्ञान के अंदर 9 नंबर का आधार मिलता ही नहीं है। लेकिन उसके बावजूद विज्ञान में कहा जाता है कि 3, 6, 9 नंबर ही पूरी दुनिया को चलाते हैं। कैसे? इसका खुलासा मैं आपको करने जा रहा हूँ। 3 नंबर होती है हवा, ऑक्सीजन, हमारे फेफड़े। यानी जो सबसे ज्यादा हम खाते हैं, वह हवा है, और फेफड़े अगर मजबूत हैं, तो ये बृहस्पति के रहने की एक सही जगह पर हैं। यह खाना और 6 नंबर यानी शुक्र, शुक्र यानी शरीर के अंदर का वह जोश जो इंसान के अंदर हर चीज की चाहत पैदा करता है।
विपरीत लिंग की चाहत, अच्छे परफ्यूम की, अच्छे कपड़ों की, अच्छे घर की, अच्छी गाड़ी की, और अच्छे बिजनेस की, यानी कि दुनिया के अंदर जो चीज अच्छी है और लग्जरी है, उसकी चाहत का जोश जिसके अंदर होता है, वो असली 6 नंबर यानी कि शुक्र का इंसान होता है। और यही कारण है बड़े से बड़े कामयाब लोगों के अवैध संबंध होते हैं, बड़े से बड़े लोगों के। आप चाहे किसी भी क्षेत्र में ले लीजिए। कारण ये है कि यही कामयाब लोग, जिनका बृहस्पति और शुक्र अच्छा है, इन लोगों के अंदर संपूर्ण यानी कि कंप्लीट प्रोसेस चलता है। इनके अंदर जो कंप्लीट प्रोसेस बृहस्पति और शुक्र मिलकर चलाते हैं, ये इंसान को रोज नया ज्ञान देने का काम करते हैं, रोज नया जोश देने का काम करते हैं। और ये ज्ञान और जोश इनको बैठने नहीं देते, रात को सोने नहीं देते। और यही वो लोग हैं जो सुबह 4 – 5 बजे उठकर जिंदगी के अंदर कुछ करते हैं।
ये बृहस्पति और शुक्र यानी 3 और 6 इन दोनों के मिलने से क्या बनता है? इन दोनों के मिलने से 6 और 3 को जोड़ें तो 9 बनता है, लेकिन कैसे? जैसे ही हम श्वास लेते हैं। बचपन के अंदर बच्चा कैसे श्वास लेता है? बहुत तेज़ – तेज़ लेता है और जैसे – जैसे हम बड़े होते हैं, हमारा श्वास पेट तक पहुंचता है। और जैसे – जैसे हम अपने काम के अंदर रुझ जाते हैं और पेट निकलने लगता है, हम लोग क्या करने लगते हैं? श्वास को छाती तक ले आते हैं और ये छाती तक आने का मतलब है कि अब आपका श्वास कम हो चुका है।
आप अब पूरी तरह से काम नहीं कर सकते और पूरी तरह से याद नहीं कर सकते और बीमारियाँ किसलिए बढ़ने लगीं क्योंकि जब श्वास आप किड़नी से लेते हैं, अपने पेट के अंदर जठा अग्नि तक जब श्वास जाता है, आपके पेट के अंदर जल रही आग के अंदर जब श्वास जाता है। दुनिया के अंदर मुझे वो अंगीठी दिखा दो जो बिना फूंक मारे जलती हो, मुझे वो आग दिखा दो जो बिना ऑक्सीजन के भड़कती हो, जल ही नहीं सकती। यानी हमारी जठा अग्नि जो हमारे खाने को पचाती है, जो हमारे शरीर में से एक-एक मिनरल्स, विटामिन और सारी चीजों को निकाल-निकाल कर शरीर के हर कोने तक पहुंचाती है, उस जठा अग्नि का नाम है मंगल यानी कि 9 नंबर और वो ताकत कभी किसी को नजर नहीं आई। और ये बृहस्पति और शुक्र मिलकर पैदा करते हैं इस मंगल को और यही वो रहस्य है 3, 6, 9 का जिससे कोई भी इंसान, कोई भी जानवर और कोई भी धरा पर, चाहे वनस्पति हो, कुछ भी हो, यह इन्हीं से बनती है और इन्हीं से चलती हैं।
कुंडली में शुक्र, शनि, राहु और केतु का महत्व
और बाकी रहे शनि, राहु, केतु। ये शनि, राहु, केतु – शनि हमारी हड्डियाँ हैं, शुक्र हमारा डीएनए – हमारा वीर्य और कैल्शियम है। इसीलिए अगर शुक्र अच्छा नहीं है तो शनि अपने आप खराब हो जाता है, हड्डियाँ अपने खो जाती हैं और राहु – केतु, राहु – केतु हमारी सोच है। जो भी इंसान हर किसी के अंदर कमी निकालने वाला, हर किसी की तरक्की पर चिढ़ने वाला, हर किसी को भेड़िया बोलने वाला, अपने बाप को भी नसीहत देने वाला बनता है, समझ लीजिए उसके शनि, राहु – केतु खराब हैं और वो दुनिया में कुछ नहीं कर सकता, चाहे जितना मर्जी उससे कुछ भी करवा ले।
उसका कारण है इस दुनिया के अंदर जितने भी डिप्लोमेटिक इंसान हुए हैं, जो हर किसी को हंसकर मिलते हैं, हर किसी को गले भी लगाते हैं और हर तरह से हर किसी के सुख-दुख में काम आने का वादा भी लेते हैं और करते भी हैं, जितना उनसे बन पड़े। और वे घमंडी नहीं होते, अपने से छोटा मिले या बड़ा मिले, आगे बढ़कर उसे गले लगाते हैं। बेटा, इनका शनि, राहु-केतु खराब होता है और लाल किताब क्या कहती है? सूर्य, चंद्र, बृहस्पति आपको धन नहीं देंगे, आपको तो धन देगा आपका दिमाग, आपकी चालाकी और आपके काम करने का तरीका, जो कि मीठा ही होना चाहिए, कड़वा बिल्कुल नहीं होना चाहिए। जिन लोगों के पास छोटा सा पैसा या समृद्धि आते ही वे घमंडी होने लगते हैं और चाहते हैं कि सामने वाला झुककर नमस्कार करें और आगे से निकले तो नमस्ते करके जाए। इन लोगों का पतन पक्का है, तय है। और जो आदमी इन सारी बातों को छोड़कर चुपचाप अपना काम करता चला जाए और जो भी मिले, उसे गले लगाए, आगे बढ़कर, इनके स्पोर्टियर इतने जबरदस्त होते हैं। शनि, राहु-केतु और शुक्र यही सही मायने में हमारी कमाई का, हमारे काम करने के तरीके का, दुनियादारी के अंदर अपना नाम कमाने का सबसे बड़ा आधार है, क्योंकि केतु झंडा है, जो इज्जत का भी होता है, ब्रांड का भी होता है, नाम का भी होता है।
शुक्र, शनि और केतु के लिए लाल किताब उपाय
इसके लिए लाल किताब के अंदर एक बहुत ही प्यारा उपाय बताया गया है क्योंकि जो तुम्हारे पास नहीं है, उसी को लेने आप दुनिया के अंदर जाते हो और आटा भी खत्म हो जाए, वो भी पंसारी से लेकर आते हो। यानी अपनी जरूरतें तो अब शुक्र, शनि और केतु की कृपा कैसे पाओगे? इसकी कृपा पाने के लिए हमारे सनातन धर्म में ये एक तरह के संस्कार बनाए गए हैं कि गाय को पालना है या गाय की सेवा करनी है। यानी जितनी गाय की सेवा की जाए, उसके पास से निकलने वाली जितनी ऊर्जा है, वह आपके अंदर उम्र के साथ जो कैल्शियम कम होने लगता है, उम्र के साथ आपके अंदर की मशीनरी जो कैल्शियम कम सोखना लगती है, कम बनाने लगती है, उस प्रोसेस को जिंदा रखती है गाय की सेवा। यानी गाय के शरीर पर हाथ फेरना, उसे खिलाना-पिलाना और कुछ देर उसके साथ रहना। आपके शरीर के अंदर वह इस प्रोसेस को पूरा बना कर रखती है।
फिर दूसरा आता है कुत्ता। कुत्ते को दरवेश बोला जाता है। हमारे यहाँ संस्कारों में कुत्ते को दरवेश बोला जाता है और कुत्ते की सेवा, यानी कुत्ते को हमारे घरों के आसपास ही रखना, अच्छी बात है। कुत्ते की सेवा आपको वफादारी का वह गुण, सकारात्मक सोच का वह गुण और बिना स्वार्थ के प्यार करना और बिना स्वार्थ के किसी के भी काम आ जाने का गुण, ये सभी आपको सिखाती है उसकी शरीर से निकलने वाली ऊर्जा। इसीलिए रोज 5 – 10 मिनट तक अगर आप कुत्ते को कुछ खिलाते हैं, उसके पास बैठते हैं, उसके शरीर पर हाथ फेर देते हैं, तो उसकी जो ऊर्जा शरीर से निकल रही है, वह आपके अंदर वफादारी और सकारात्मक सोच का गुण बढ़ा देती है।
और कौवा। इसे हमारे संस्कारों में पितृ माना गया है। कहते हैं ना, आज कोई घर पर आ रहा है और कौवा बोल रहा है तो कोई न कोई रिश्तेदार आने वाला है, यह सत्य बात है। हम लोग आज इतनी उम्र के हो गए हैं कि करंट लग गया हो तो बात अलग है, नहीं तो किसी ने भी प्राकृतिक मृत्यु आज तक कौवों की नहीं देखी होगी। कारण यह है कि वास्तविकता में कौवे की इतनी उम्र है, गूगल चाहे कुछ भी बताता हो, एक कौवे की उम्र हमारी कई पीढ़ियाँ देखती हैं। इतनी लंबी उम्र होती है कौवों की, इसलिए उस कौवे को याद रहता है कि कौन-सा उनका रिश्तेदार है, यह यहाँ से निकला है, इस रास्ते से जा रहा है, तो इसी जगह पर जा रहा होगा, तो पहले जाकर बता देता हूँ। और कहते यह भी है कि हमारे पितरों का वास भी उनमें होता है। हमारा संदेश भी वहाँ लेकर जाते हैं। कारण, कौवा अगर किन्हीं उम्रों में जीवित रहा है, तो बेटा, वो वक्त को देख-देख के वो चतुर हो चुका है। उसे हर अच्छे-बुरे भाव का पता है, किस वक्त तुम क्या करना चाहते हो, वो शक्ल देखकर समझता है। उसके इस गुण को प्राप्त करने के लिए हमें कौवे को कुछ न कुछ खिलाना ही पड़ेगा और रोज खिलाना पड़ेगा। हमारा शनि और बुध अपने आप अच्छा हो जाएगा।
इसलिए लाल किताब के अंदर यह उपाय है कि हर रोज घर की पहली रोटी आधी गाय को, आधी कुत्ते को और आधी कौवों को अगर दोगे तो शनि, केतु, और शुक्र तीनों प्रसन्न रहेंगे। और अगर ये प्रसन्न रहेंगे तो आप स्वस्थ रहेंगे, मीठे रहेंगे, मिलनसारी के अंदर अपनी जिंदगी, रिश्तेदारी सब बढ़ाकर रखेंगे। और इनके सहारे आप सभी इस भाव में जिएंगे कि कभी न कभी तो कोई न कोई आपके काम आकर आपके अटके हुए कामों को संवारेगा ही।
निष्कर्ष
सही मायने में धन देने वाले शनि, राहु, केतु और शुक्र हैं; सूर्य, मंगल और बृहस्पति नहीं देते क्योंकि ये तीनों गुस्से वाले हैं। और डिप्लोमेटिक कौन है, शुक्र, शनि, केतु और जो डिप्लोमेटिक होते हैं, वही तो धन कमाते हैं। तो ये लाल किताब का सुझाव मैंने आपको दिया है, अपने रिश्तों को अच्छा रखो।
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