gurudev se jane manglik gandmool dosh

गुरुदेव जी से जानें मांगलिक योग, गंडमूल दोष, शुभ मुहूर्त और अन्य ग्रहों के अनसुलझे रहस्य

मांगलिक दोष: एक गलतफहमी या सत्य?

 

अगर मांगलिक बच्चे के साथ वाकई में आपके बच्चे का विवाह होता है, तो आप अपने आप को भाग्यवान समझिए। मैं यह बोल तो रहा हूं, लेकिन इसके पीछे तर्क क्या है? इसके पीछे का जो सबसे पहले लाल किताब तर्क बताती है, वह यह बताती है कि पापी ग्रह या दो दुश्मन ग्रह अगर आपस में मिल जाएं, तो मांगलिक कभी भी मांगलिक नहीं रहता। पापी ग्रहों में कौन है? शुक्र, शनि, राहु, केतु; इनमें से कोई भी दो-तीन आपस में बैठे हुए हों, तो मांगलिक योग मांगलिक नहीं होता। और दो दुश्मन ग्रह जैसे सूर्य और राहु मिल जाएं, सूर्य-केतु मिल जाए, सूर्य-शुक्र मिल जाए, अगर आपस में मिल जाएं, तो मांगलिक दोष मांगलिक नहीं रहता है। और उसके बाद दूसरी बात, मांगलिक तभी बनता है जब मंगल बद हो जाए और मंगल अकेला हो। मंगल अगर अकेला होगा, तो मंगल बद होगा। या कुछ खास स्थितियों में मंगल बुध के साथ हो, तो उसे बहुत बुरा माना जाता है, क्योंकि मंगल और बुध जब मिल जाते हैं, तो लाल किताब उसे बोलती है नीच राहु। तो नीच राहु यानी कि नीच सोच तो खराब करने वाली है ही। तो इसीलिए मंगल और बुध के मिलने से मिलता, लेकिन वो भी खास घरों में।

 

लाल किताब का दृष्टिकोण: मांगलिक योग कब अमांगलिक बन जाता है?

 

जब भी जन्म कुंडली के पहले घर में, तीसरे घर में, और आठवें घर में बुध या केतु बैठे हुए हों, तो मंगल खराब होता है। शुक्र यदि नौवें घर में हो, तो मंगल खराब होता है। यदि शुक्र और बुध नौवें घर में हों और पहले, तीसरे, छठे, सातवें, नौवें, और ग्यारहवें घर में बृहस्पति, चंद्र, और केतु न हों, तो मंगल खराब होता है। बहुत आसान तरीके से यह समझाया गया है। इसके बाद, यदि मंगल इन कंडीशनों में खराब नहीं है, तो आप निर्णय ले सकते हैं कि शादी हो जाए। लेकिन यह एक और अनुभव है, जो मेरा अपना है: यदि मंगल बारहवें घर में बैठा हुआ है और यदि दसवें घर में उसका दुश्मन ग्रह बैठा हुआ है, तो भूलकर भी उस बच्चे के साथ नॉन-मांगलिक की शादी नहीं करनी चाहिए, चाहे मंगल शुभ हो या मंगल खराब हो। लेकिन यदि दसवें घर में उसका कोई दुश्मन ग्रह बैठा है, तो शादी नहीं करनी चाहिए। फिर मांगलिक का पूरा मिलान करके और दसवें घर के ग्रह की वस्तुओं को 43 दिन मंदिर में पहुंचाने के बाद, यदि उस बच्चे के साथ आपकी कुंडली मिलान की जाती है, तो उसकी शादी करोगे, तो चलेगी; नहीं तो नहीं चलेगी।

 

यह भी पढ़ें: खराब ग्रह पहचानने से लेकर उन्हें सुधारने तक - जानें गुरुदेव जी.डी. वशिष्ठ जी से

 

मंगल का तीसरे भाव में प्रभाव

 

तीसरा, लगन के अंदर मंगल हो और दसवें घर के अंदर उसका दुश्मन ग्रह बैठा हो, ग्यारहवें घर के अंदर उसका दुश्मन ग्रह बैठा हो, तीसरे घर के अंदर उसका दुश्मन ग्रह बैठा हुआ हो, यह भी शादियाँ ढंग से नहीं चलती, कंप्रोमाइस करके चल सकती है या आज के जमाने में जितनी जल्दी अलग हो जाते, उस तरह से चल सकती है, वरना यह शादियाँ नहीं चला करती। तो दो तरह के मंगल ये क्लियर हुए। फिर लाल किताब पढ़ने वाले जानते हैं, लाल किताब लिखती है कि दूसरे और चौथे घर में ग्रह न हो तो वह अच्छा है। जबकि दूसरे घर को धन भाव माना जाता है और चौथे घर को पूंजी जमा करने वाला घर माना जाता है, तो क्यों न हो, भाई? उसका कारण है अकेले दूसरे घर में ग्रह हो और चौथे में न हो, तो आपकी कुंडली बहुत अच्छी है। लेकिन अगर दूसरे में और चौथे में आपके ग्रह बैठे हुए हैं, तो आपकी कुंडली निकम्मी कुंडली है। आपको दुख देगी ही देगी। कारण, दूसरा घर हमारी वाणी है और चौथा घर हमारा यह छाती वाला पोर्शन आ जाता है। लेकिन इसमें पांचवा घर यानी कि दिल ही वास करता है। जब दिल कुछ कहे, दिमाग कुछ कहे, यानी वाणी, वाणी तो हमारा दिमाग ही बनेगी न। सोच जब दिल कुछ कहे, वाणी कुछ और कहे, आदमी फँस के रह जाता है, सही काम नहीं कर पाता। और यह दोनों एक साथ चलते हैं, यह साइंस है। और यह दोनों एक साथ चलेंगे, तो कभी भी ऐसा नहीं हो सकता कि आदमी जो सोचता है, वह कह रहा हो और जो कह रहा है, वह सोच रहा हो। यह पॉसिबल नहीं हो पाता। इसीलिए लाल किताब के अंदर स्ट्रिक्टली मना किया गया है कि बच्चे की जन्म कुंडली के अंदर अगर दूसरा घर और चौथा घर भरा हुआ है, तो यह अच्छा नहीं है।

 

चौथे भाव में मंगल का प्रभाव


और चौथे घर के अंदर मंगल हो, दूसरे घर में और छठे घर के अंदर अगर ग्रह बैठा है, दोनों में बैठे हैं, फिर तो जिंदगी बहुत खराब है। और अगर कोई एक, यानी कि दूसरे में कोई नहीं, छठे में है, छठे में है, दूसरे में कोई नहीं है, फिर भी चल सकती है। इसी प्रकार, सातवें में, सातवें के अंदर अगर मंगल के साथ बुध बैठ गया, इससे बुरा तो कुछ नहीं हो सकता। और मंगल और बुध के साथ में कोई एक आकर शनि भी बैठ गया, इससे अच्छा तो महा बुरा कुछ और हो ही नहीं सकता। मामा को जंगल जाना पड़ेगा, मामी बर्बाद होंगी, अपना पेट, अपनी आँखें, यह सारी खराब होंगी। और जिस चीज के लिए शादी की जाती, वह गुण ही नहीं होगा। अगर होगा, तो साइको जैसा होगा, जिसके अंदर जीवनसाथी कभी खुश नहीं हो सकता, तो वह शादी कैसे चलेगी, वह भी नहीं चल सकती।

 

सातवें भाव में मंगल का प्रभाव


लेकिन मान लीजिए मंगल, सातवें घर के अंदर अकेला ही है, तो ऐसी अवस्था में अगर उसके दुश्मन ग्रह या नारी ग्रह चंद्र और शुक्र नौवें या पांचवें में बैठ गए, या मंगल के दुश्मन नौवें या पांचवें में बैठ गए, तो वह शादी भी कभी नहीं चलेगी। वहां मित्र बैठ जाए, तो काफी हद तक अच्छा है, और अगर कहीं आठवें घर का मांगलिक देखना हो, तो आठवें घर का मांगलिक सर्वोत्तम होता है, अगर उसके दुश्मन ग्रह ग्यारहवें घर में और पांचवें घर में न हों। इसको लाल किताब स्क्वेयर के नाम से बोलते हैं, और जिसके ग्यारहवें और पांचवें घर में दुश्मन ग्रह बैठा हो, वह आदमी इस आग में अपने आप को ही जलाता है, मंगल की आग में अपने आप को जलाता है, और उसके लक्षण मिलते हैं कि ऐसा इंसान जहां भी मकान बना के रहेगा, वहां पर पहले भट्टी, तंदूर, आग के अंदर जलाने वाली चीजें वहां पकती होंगी, उसके ऊपर उसका मकान बना होगा। किसी के भी ऐसे में चेक करके देख लीजिए कि आठवें घर के अंदर अगर मंगल बैठा है और ग्यारहवें और पांचवे घर में उसके दुश्मन ग्रह हैं, तो उसे मकान मिलता ही वही है। तो ऐसी अवस्था में वहां पर जो भी ग्रह ग्यारहवें में या पांचवे में बैठा हो, लाल किताब के अनुसार मैं जानता हूं, वैदिक वाले अपने तरीके से जानते होंगे, उन ग्रहों का निवारण करके, उसे दूर करके, तब अगर जरूरी हो, तो शादी करेंगे, तो वह शादी चलेगी।

 

बच्चा मांगलिक है, मान लीजिए कि सातवें घर के अंदर मंगल है, लग्न के अंदर बेशक शनि बैठे हुए हों, लेकिन अगर पांचवे में और नौवे में मंगल का दुश्मन ग्रह नहीं है, तो आप उसे आंख बंद करके अपने नॉन मांगलिक बच्चे की शादी करके देखिए।

 

गंडमूल दोष: लाल किताब और वैदिक दृष्टिकोण में अंतर

 

गंडमूल, गंडमूल योग बिल्कुल खराब नहीं होता। लिखी गई गंडमूल के लिए जो चीजें हैं कि कौन से नक्षत्र, कौन से चरण के अंदर क्या होगा, वह बिल्कुल सत्य है। वह इंसान के जीवन के अंदर घटित होता है, लेकिन उसमें तो अच्छा भी बहुत लिखा है। गंडमूल के अंदर तो गंडमूल बुरा कैसे हो गया? पहले यह चेक करना पड़ेगा कि कौन सा नक्षत्र, कौन सा चरण और उसके अनुसार हमारे साथ क्या होना है, यह वैदिक ज्योतिष चेक करता है। लेकिन लाल किताब में अब गंडमूल दोष कौन से नक्षत्र में हुआ, बुध के या केतु के, तो देखना क्या है? जिस नक्षत्र के अंदर यह गंडमूल दोष बना है, हमारे उस ग्रह की स्थिति क्या है? केतु कहां है? केतु अगर राशि के हिसाब से नहीं, लाल किताब के हिसाब से घरों के हिसाब से, तो केतु कहाँ है? क्या उसको कोई ग्रह टक्कर मार रहा है? क्या उसके आगे-पीछे, यानी कि वही जो तीसरे के डिफरेंस के ऊपर मैंने समझाया है, क्या उसके दुश्मन ग्रह वहाँ पर हैं? अगर वहाँ दुश्मन ग्रह नहीं हैं और उसको टक्कर नहीं पड़ रही है, तो वह जिस चरण के अंदर जो प्रडिक्शन लिखी है, उसके अलावा कुछ भी और जिंदगी के अंदर उसके बुरा नहीं होगा। और कहीं अगर अच्छा भी लिखा हुआ उस चरण के अंदर, अगर उसके आगे तीन घर में, पीछे तीन घर में, अगर उसके दुश्मन बैठ गए, तो उसका बुरा जरूर होना है, चाहे वहाँ पर शुभ ही लिखा हो। और अगर अशुभ लिखा है, तो अशुभ की घटना जिस हिस्से को इंडिकेट की गई है, उसके अलावा उसका जिंदगी में कभी बुरा नहीं होगा। यह बुध वाले नक्षत्रों में भी ऐसे ही होगा। तो बुध को देखा जाएगा और केतु वाले नक्षत्रों में हुआ, तो केतु को देखा जाएगा। इतना आसान है चेक करना और प्रडिक्ट करना। करके देखिएगा, अगले साल फिर मिलेंगे।

 

यह भी पढ़ें: गंडमूल दोष क्या है? जानिए इसके प्रभाव और समाधान

 

ग्यारहवें और तीसरे घर में दुश्मन ग्रह: व्यक्तित्व पर प्रभाव

 

तीसरा, अभी बात अक्षय ने कही, शनि लगन में बैठा हो तो आदमी लंबा, मंगल बैठा हो तो भी लंबा चौड़ा। लेकिन ये लगन में बैठे हुए मंगल और शनि वाले गिठ्ठें से क्यों पैदा हो जाते हैं और या फिर बहुत ज्यादा सुंदर क्यों नहीं लगते? क्योंकि शनि अच्छा हो, लगन में बैठा हुआ मंगल अच्छा हो, बहुत रौबदार, बहुत अच्छे और अट्रैक्टिव इंसान की शख्सियत बनती है। इसके पीछे वही लॉजिक काम करता है कि अगर ग्यारहवें में और तीसरे में इनके दुश्मन बैठ गए, तो वो आदमी अट्रैक्टिव बिल्कुल नहीं लगेगा। उसकी कद-काठी में कोई भी दोष हो सकता है। उसकी अट्रैक्शन में दोष हो सकता है, उसकी वाणी में दोष हो सकता है, उसके कर्म में दोष हो सकता है।

 

मोक्ष का वास्तविक अर्थ और उसका ज्योतिषीय समाधान

 

मोक्ष पूजा-पाठ का नाम नहीं है। रोज सुबह दिनचर्या के ऊपर उठकर नहा-धोकर तीन घंटे पूजा को लगाना कोई इंसान इससे मोक्ष नहीं पा सकता। मोक्ष पाने का मात्र एक तरीका है शनि को अच्छा करना और शनि के केतु स्वभाव को अच्छा करना, क्योंकि लाल किताब कहती है मोक्ष का कारक कौन है। केतु बारहवें घर का जन्म कुंडली के अंदर केतु बारहवें घर में हो तो वह मोक्ष का कारक माना जाता है। लेकिन लाल किताब यह भी बोलती है कि केतु बारहवें में हो और आदमी ऐश-प्रस्त न हो तो वह जिंदगी में कभी भी केतु बारहवें का फल भोग ही नहीं सकता, तो यानी उसे मोक्ष मिल ही नहीं सकता। मोक्ष पाने की डेफिनेशन, जब आपको सामने वाले की किए हुए की जलन न हो तो आप मोक्ष के पात्र हो।

 

और मोक्ष का हकदार वह होता है, जिसको बचपन से पांव हाथ लगाने की, झुकने की और जिस किसी के लिए भी बिना यह सोचे कि ये क्या सोच रहा है, सामने खड़े होकर झुककर प्रणाम करके, नमस्कार करके, गले लगने की आदत हो। वह चाहे गरीब हो या अमीर हो, उसको उसके बाद मोक्ष का रास्ता मिल ही जाएगा, यह बात पक्की है। तो अकड़ू-खाँ को परमात्मा भी अपने यहाँ जगह नहीं देना चाहता, कहता है, "चल धक्के खा के आ पहले।"

 

शनि और राहु से भी बहुत ज्यादा दुख देने वाले ग्रह कौन से हैं?

 

शनि और राहु से भी बहुत ज्यादा दुख देने वाले ग्रह हैं बृहस्पति, सूर्य, मंगल। ये शनि और राहु के बाप हैं और जब ये खराबियाँ देते हैं तो इंसान की अक्ल को ही मार देते हैं। जिसकी अक्ल ही मर गई, वह बदयांती हो जाती है, ना समझ आने वाला, जिसको कुछ अक्ल ही नहीं आती, समझ ही नहीं पाता सामने वाले को, ना समझ पाता, माहौल को ना समझ पाता, तो बेटा शनि-राहु भी उसका क्या बिगाड़ेंगे, उन्होंने तो अपने आप ही सारा कुछ बिगाड़ लिया। सूर्य अकेला पांचवें घर को छोड़कर या आठवें घर को छोड़कर कहीं भी बिठा दीजिए, सूर्य कभी पूरा अच्छा फल नहीं देता, बहुत मध्यम हो जाता है। और पांचवे और आठवें घर के अंदर, यह शनि की राशि में छोड़कर और किसी भी घर में शनि की राशि में हो, तो यह उतना शुभ फल कारक नहीं रहता।

 

सूर्य के साथ कौन बैठा है, ये क्यों मायने रखता है?

 

जैसे भाग्य स्थान के अंदर सूर्य के लिए बोला जाता है कि यह परिवार के लिए सब कुछ करेगा, उनसे कभी उम्मीद भी नहीं रखेगा, उनसे कभी मांगेगा भी नहीं और उनको मालामाल करेगा। लेकिन वही भाग्य स्थान के अंदर मकर राशि का सूर्य अकेला बैठा कर के उसके अंदर यह गुण दिखा दो, मान जाऊंगा नहीं पॉसिबल। क्योंकि अकेला सूर्य शनि की ठंडक से बिल्कुल कमजोर हो जाता है। लेकिन इसके विपरीत, सूर्य अगर दूसरे ग्रहों के साथ संबंध में हो, साथ बैठ के या दृष्टि से, सूर्य की ताकत कई गुना बढ़ जाती है और सूर्य बहुत कुछ देने के काबिल हो जाता है। लेकिन अब यहाँ आकर के आपको एक चीज और देखनी है कि सूर्य राहु या केतु के साथ बैठा है या शुक्र के साथ बैठा है, शनि के साथ बैठा है, बृहस्पति के बुध के साथ बैठा है, किसके साथ बैठा है? जैसे सूर्य बृहस्पति के साथ बैठ जाए तो बहुत शुभ फल कारक है। पर शर्त क्या है? शर्त यह है कि यह सूर्य और बृहस्पति छठे में, सातवें में और दसवें घर में नहीं होने चाहिए इकट्ठे। अगर यह होंगे तो वह इंसान तो अपने आप को नहीं चला सकता, दुनियादारी क्या निभाएगा और क्या दौड़ाएगा।

 

लेकिन चला सकता है जब शुक्र सातवें से लेकर बारहवें घर के बीच में हो तो यह सूर्य-बृहस्पति बहुत अच्छे हैं और बाकी हर जगह पर सूर्य-बृहस्पति मिलना अच्छा है। आदमी लॉजिकल तरीके से अपनी जिंदगी को चलाता हुआ अपने परिवार के लिए, समाज के लिए करता हुआ बहुत अच्छा जाएगा, लेकिन छठे, सातवें या दसवें घर के अंदर हो और शुक्र एक से छह घर के अंदर हो तो यह सबसे बुरा योग माना जाता है। वहीं पर कुंडली फेल हो जाती है, बहुत बड़ी कामयाबियाँ भूल जाओ। सूर्य-बुध, बुध-आदित्य योग, अति उत्तम माना जाता है, लेकिन वही आठवें घर के अंदर हो और दूसरे घर में कोई ग्रह न हो तो इससे बुरा योग भी कोई नहीं है। आठवें घर के अंदर यह हो, ग्यारहवें घर के अंदर सूर्य का दुश्मन ग्रह बैठा हुआ हो, इससे बुरा योग कोई नहीं है। आठवें घर के अंदर यह हो और दसवें घर के अंदर सूर्य का दुश्मन ग्रह हो तो इससे बुरा योग कोई नहीं है।

 

वहाँ यह कंसीडर नहीं किया जा सकता, नहीं तो सूर्य बुध के साथ अति उत्तम अवस्था के अंदर होता है। सूर्य शुक्र के साथ आ जाए, आदमी दुनिया के हर काम को कर सकता है, जोश पूरा होगा। लाल किताब कहती है कि इसका सूर्य कामकाज के मामले में बहुत अच्छा है, लेकिन अंदर से मलीन हृदय, चोरी, विपरीत लिंगी की चाहत, उम्र कोई भी, कोई परवाह नहीं, यह इससे नहीं बच सकता। शनि के साथ मिल जाए, तो झूठ आदमी की रग-रग में होता है, छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी बात को लेकर, काम या फेलियर अपने काम के अनुसार। राहु के साथ हो जाए, तो मैंने बहुत सारे जजों की कुंडली के अंदर सूर्य-राहु को इकट्ठे देखा है, और जिसमें लाल किताब बताती है कि नौवें और बारहवें घर के अंदर, तो खासतौर पर सूर्य ग्रहण नहीं होना चाहिए। मैंने उस योग के अंदर जजों को बनते देखा है। लेकिन बाद में उनको अपने लिए तरीके भुगतते देखा है, क्योंकि सूर्य के ऊपर कालक डालता ही डालता है। लेकिन, वैसे अगर सूर्य-राहु इकट्ठे हो जाए, तो आज का सबसे बड़ा धंधा शेयर मार्केट है, उसके लिए आदमी एलिजिबल हो जाता है, और उसको किस्मत ऐसा साथ देती है कि वह आदमी शेयर मार्केट के अंदर कमाता है। सूर्य-राहु का मेल इस अवस्था में बुरा भी नहीं है।

 

और एक बड़ी खास बात, जिसका सूर्य - केतु इकट्ठा हो जाए, ऐसे आदमी को कभी जिंदगी में अपनी भेद की बात मत बताना। उसके लिए लाल किताब कहती है, कानों का कच्चा। आपकी बात लीक होगी ही होगी, समझ गए? तो यह सिर्फ देखा ही नहीं है, एक्सपीरियंस भी किया है।

 

13 नंबर की मान्यता और लाल किताब का रहस्य

 

आपने देखा होगा कि 13 नंबर को बुरा माना जाता है। 13 नंबर का कमरा नहीं होता, 13 नंबर का फ्लोर नहीं होता, आजकल तो बड़ा स्ट्रिक्टली है। तो 13 नंबर बनता कैसे है? 1 नंबर और 3 नंबर को मिलाकर, 1 नंबर सूर्य, 3 नंबर बृहस्पति। तो एक थ्योरी है, सूर्य के घर में जो भी ग्रह आकर बैठ जाए, उसकी ताकत क्षीण हो जाती है। सूर्य अगर बैठा हुआ हो, तो उसके आगे नहीं चल पाती। इसी प्रकार से मैंने एक शब्द और बोला कि सूर्य अकेला हो, तो मुसीबत किसी काम का नहीं, लेकिन सूर्य और बृहस्पति मिले हुए हों, छठे, सातवें या दसवें घर के अंदर हों, शुक्र पीछे हो, तो यह 13 नंबर का फल आता है। 4 नंबर यानी कि राहु, राहु यानी कि भूत, भूत यानी कि ऊपरी हवाएं और ऊपरी सारे हालात वहां पर क्रिएट होते हैं। और ऐसा दुनिया के अंदर बहुत जगह है, जहां 13 नंबर रहा और इस तरह के हालात हैं। और सच में भूतों को वहां महसूस किया जाता है। और मैं ऐसी दो - चार जगह पर होकर भी आया हूं, महसूस करके भी आया हूं, क्योंकि मुझे यह जानना था सब।

 

तो 13 नंबर हो तो ऐसी अवस्था में वह जब प्रॉपर्टी बनी उस वक्त में जब उसका ग्रह प्रवेश हुआ, अगर सूर्य और शनि उस वक्त में छठे, सातवें या दसवें घर में रहे और शुक्र पीछे रहा, वहां पर ऊपरी हवाओं का आना तय है। वहां पर दुर्घटनाएं घटित होना तय है और वहां अशुभ का वातावरण, नेगेटिविटी बनना तय है। तो इसीलिए चाहे कितना भी शुभ मुहूर्त निकला हुआ हो, सिर्फ 13 नंबर की बात नहीं कर रहा हूं।

 

शुभ मुहूर्त कैसे तय करें?


कितना भी शुभ मुहूर्त निकला हुआ हो, सूर्य और बृहस्पति उस वक्त छठे घर में, सातवें घर में, दसवें घर में ना हो या फिर सिर्फ सूर्य और बृहस्पति छठे घर में, सातवें घर में या दसवें घर में ना हो और शुक्र तो बिल्कुल भी एक से छह घर में ना हो। समझ गए? अगर इस तरह का कोई मुहूर्त निकला, जिसके अंदर यह सारा लॉ अप्लाई होता, तो वह मुहूर्त त्याग दीजिए। और जब ये इन घरों में ना हो या हो, लेकिन शुक्र 7 से लेकर 12 घर के अंदर हो, उसके अंदर अगर कोई मुहूर्त आप करते हैं, तो उस घर के अंदर उस मुहूर्त का जबरदस्त आपको फायदा मिलेगा और आपकी जिंदगी में कभी कुछ बुरा नहीं हो सकता। आप हमेशा सुख को प्राप्त करें।

 

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