गुरुदेव जी से जानें गॉड पार्टिकल, जीवन चक्र और लाल किताब के उपाय

गुरुदेव जी से जानें गॉड पार्टिकल, जीवन चक्र और लाल किताब के उपाय

धरती पर जीवन की शुरुआत और प्राथमिक तत्व

 

इस धरती पर सबसे पहले क्या आया? इस धरती पर अगर देखा जाए तो सबसे पहले सूरज की रोशनी आई, इसे कोई नकार नहीं सकता, इसलिए पाराशर ज्योतिष के अंदर सबसे प्रधान सूर्य को माना जाता है। लेकिन लाल किताब के अंदर प्रधान बृहस्पति को माना जाता है, इसलिए दूसरा क्या आया?

 

दूसरी आई हवा, और जहां सूर्य है, वहां शनि तो जरूर है, क्योंकि सूर्यपुत्र शनिदेव है। तो जहां पर भी सूर्य निकलने के बाद धूप नहीं पड़ेगी, वह शनि का स्थान होगा। तो यानी सबसे पहले दुनिया में सूर्य, बृहस्पति और शनि, ये तीनों आए। अब शनि को जो स्थान देना है, वो आप सब लोग बाद में तय करके बताना कि इनको मैं सूर्य के बाद शनि बोलूं या बृहस्पति के बाद शनि बोलूं? ये आखिरी में, मैं आपसे जवाब लूंगा। तो सूर्य, बृहस्पति, शनि, ये धरती पर आ गए। तब तो यहां समुद्र भी नहीं होता था। तो समुद्र की पैदाइश कहां से हुई?

 

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समुंद्र की जो पैदाइश हुई, यह मैंने अपने अनुसार समझा है, ये किसी किताब में नहीं लिखा हुआ, हमारे वेदों में पता नहीं लिखा है कि नहीं, वो पढ़ने वाले जानते होंगे। तो उसके बाद में जब शनि देव धरती पर थे, शनि का मतलब ठंडक, बर्फिला पहाड़, जितनी हिमालय के ऊपर बर्फ पड़ी हुई है, हम उसे शनि मानते हैं। और जब बृहस्पति का संबंध उससे मिलता है, तो यह शनि पिघल कर चंद्रमा बन गया, यानी पानी बन गया। तो चौथा कौन आया? चंद्रमा।

 

आज भी जब बर्फ पहाड़ों पर जमती है और वह पिघलकर नीचे आती है, तो वह एक इंसान के काबिल बनती है, शीतल जल बनती है, जो वह पीता है। उसमें साफ, स्वच्छ हवा का भी मिश्रण होता है, तो मुझे लगता है गज केसरी योग यही होता होगा। तो अब आगे बढ़ते हैं लाल किताबों के असूलों के साथ। वह क्या हैं? अब सूर्य आ गए, बृहस्पति आ गए, शनि आ गए, चंद्र आ गए। अब धरती पर जीवन कैसे शुरू हुआ? धरती पर जीवन नहीं शुरू हुआ, धरती से पहले समुद्र में जीवन शुरू हुआ। और समुद्र के अंदर जब कई तरह की प्रक्रियाएँ हुईं, यानी कि सूरज की गर्मी और नीचे से लावा जो धरती के अंदर फूटता है, जो धरती के अंदर गर्मी बना कर रखता है। जब उसकी गर्मी और ऊपर की गर्मी के मिश्रण से उत्पन्न हुई चीजें किसी ऐसे स्थान पर चली गईं जहाँ पर शनि का अंधेरा ही अंधेरा था, कहीं गुफा थी या कुछ था, वहाँ पर किसी झिल्ली का निर्माण हुआ, किसी लार्वा का निर्माण हुआ, किसी अंडे का निर्माण हुआ। तो कहने का मतलब क्या है? कहने का मतलब यह है कि शनि के स्थान पर बुध उत्पन्न होता है क्योंकि लार्वा, झिल्ली, अंडा कुछ भी है, इसके लिए शनि का होना बहुत जरूरी है। यही कारण है कि सांझ होते ही हम शयन को जाते हैं और मियां-बीबी मिलकर नए जीव को पैदा करते हैं। क्योंकि उसके अंदर कुछ भी हो, लार्वा हो या अंडा, पैदा करने के लिए सबसे उत्तम वक्त अंधेरा और ठंडक होती है।

 

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पृथ्वी और मिट्टी का निर्माण

 

फिर उसके बाद धरती बंजर थी, पेड़–पौधे भी नहीं थे। तो उस वक्त में जो झिल्ली, लार्वा पैदा हुए, उनसे मत्स्य, मछली पैदा हुई। मत्स्य अवतार भी बोलते हैं, तो वो उत्पन्न हुए। उसके बाद जब उन मछलियों ने बाहर निकलने की कोशिश की और कई बार बाहर निकलकर मरीं, तो वो खाद बनीं और जब वो खाद बनी, तो रेत के अंदर खाद बनने के बाद वो मिट्टी में कन्वर्ट हुई। तब धरती पर शुक्र का जन्म हुआ, तब मिट्टी बनी और जब धरती पर शुक्र आया, यानी कि जीव आत्मा, यानी कि अंडा तो पहले ही बन चुका था शनि की वजह से। उसके बाद जब शुक्र मिला, तो वो क्या बना? तब निर्माण हुआ गॉड पार्टिकल का। जिसको वैज्ञानिक ढूंढते-ढूंढते आज तक थक चुके हैं, वो गॉड पार्टिकल तब बना। तब जीव बनने शुरू हुए, वनस्पतियाँ बननी शुरू हुईं, घास-फूस उगीं और इनकी जरूरतों के अनुसार रोज यह चक्र चलने लगा।

 

ग्रहों के आपसी संबंध और मानव जीवन

 

इसलिए शुक्र, बुध, शनि को परम मित्र माना जाता है। यही कारण है कि शुक्र, शनि, और बुध परम मित्र हैं। और जब ये शुक्र उत्पन्न हुआ, खून का निर्माण तब हुआ। चाहे वाइट सेल्स हों या रेड सेल्स हों। खून का निर्माण तब हुआ, यानी सबसे बाद में धरती पर मंगल आए। लेकिन मजे की बात यह है कि इसी को साइंस कहते हैं। जो अपने बोले हुए व्यक्तित्व के ऊपर भी सवाल खड़ा करें कि अगर ये धरती पर मंगल पहले न होता, तो क्या ये होते। सच बात है, मंगल तो पहले ही था, न रेत के रूप में मौजूद था। रेत के रूप में मंगल पहले धरती के ऊपर मौजूद था। ये कह सकते हो कि शुभ मंगल तब पैदा हुआ जब शनि, शुक्र और बुध मिले। तब शुभ मंगल पैदा हुआ। तो इंसान के शरीर के अंदर अब हम झांक कर देखेंगे। कभी भी किसी भी इंसान की जब आंतें कमजोर हो जाती हैं, मसल्स कमजोर हो जाते हैं, तो सबसे पहले उस आदमी के बोलने की क्षमता कम होने लगती है, काम करने की क्षमता कम होने लगती है, जोश कम हो जाता है, गृहस्थी के काबिल नहीं रहता, मियां-बीवी के मिलन के काबिल नहीं रहता। जब भी किसी इंसान की नसें कमजोर हो जाती हैं, चाहे वो आदमी हो या औरत हो। जब उसके मसल्स टूट जाते हैं, तब भी यही हालात बनते हैं।

 

इस चीज को अगर थोड़ा सा बढ़ावा दे दिया जाए और बहुत देर तक इनका कोई भी ट्रीटमेंट न लिया जाए या एक्सरसाइज न की जाए या खानपान वैसा न सुधारा जाए, तो ये मसल्स टूटने के बाद हड्डियाँ अपनी जगह छोड़ देती हैं। यानी कि कभी कमर में दर्द, कभी पाँव में दर्द, कभी घुटनों में दर्द, कभी जोड़ हिल जाना, ये सब वहीं से शुरू होता है। तो आपके मसल्स, आपकी नसों ने आपका शरीर खड़ा कर रखा है। अगर ये न हों, तो हड्डियाँ तो ढाँचा हैं; जैसा खड़ा करोगे, वैसे ही गिर जाएगा। तो इसका मतलब क्या है? जब तक जन्म कुंडली के अंदर शुक्र और बुध प्रबल नहीं होंगे, तब तक शनि कभी आपको सुख नहीं दे सकता। क्योंकि बुध है - बुद्धि और शुक्र है - जोश। जब ये बुद्धि और जोश ही चले गए, तो आप कहाँ से कमा लोगे? आप कमा ही नहीं सकते, किसी चीज के लायक हो ही नहीं। तो अब देखिए, शुक्र और बुध कितना ज़रूरी है।

 

लेकिन यहाँ फिर एक और बात है कि बिना चंद्र के क्या शुक्र की ताकत को बढ़ाया जा सकता है? क्योंकि पानी दिए बिना तो कोई पौधा पैदा हो ही नहीं सकता। लाख मिट्टी उपजाऊ हो, लाख उसके अंदर बीज डाल दिया जाए, जब तक पानी की नमी नहीं मिलेगी, क्या पौधा पैदा हो सकता है? क्या झिल्ली पैदा होगी? नहीं। अब चलो, मिट्टी भी पैदा हो गई, मिट्टी है, बीज लगाया, पानी दिया, पौधा पैदा होगा। क्या बिना बृहस्पति के कोई जीव, फल-फूल, पेड़-पौधा फल सकता है? नहीं फल सकता। तो बिना हवा के तो कुछ नहीं हो सकता।

 

ग्रहों का प्रभाव और कुंडली विज्ञान

 

अब कुंडली देखना यहाँ से शुरू होता है। क्योंकि इतना हिस्सा तो हमने समझ लिया सारा। अब यहाँ से साइंस, यानी कि कुंडली देखना, शुरू होता है तो वो कैसे? लाल किताब के अंदर एक लॉ है कि अगर बुध पीछे हो और शुक्र आगे हो, तो ऐसे इंसान के शरीर में कोई कमी हो, वो बच्चा पैदा करने में सक्षम है। बुध क्या है? बुध है मिट्टी के अंदर दबी हुई वह खाद जो बीज या जीव पैदा करने में सक्षम है, यानी उर्वरकता वाली मिट्टी है; तो ये अगर शुक्र से पीछे, यानी कि मिट्टी के अंदर है, तो कोई भी पेड़-पौधे लगाइए, वह उग जाएगा। इसी तरह से इंसान की कुंडली के अंदर, अगर बुध पीछे हैं और शुक्र आगे हैं, ऐसा इंसान जीव पैदा कर सकता है।

 

लेकिन अगर कहीं शुक्र पीछे और बुध आगे हो, तो उसको कई बार सारे ग्रह बाकी के स्पोर्ट करें और एक मंगल खराब हो जाए, ऐसा इंसान बच्चा पैदा करने में बिल्कुल सक्षम नहीं होता, चाहे वो कितने जीवनसाथी बदल ले। वह जीव पैदा करने में सक्षम नहीं होता। इसी प्रकार से जितनी उपजाऊ धरती है, वहाँ आपको सारे धंधे वाले लोग मिलेंगे। यानी कि बिजनेस करने वाले लोग ज्यादातर और जहां पर बुध आगे और शुक्र पीछे गए, यानी कि राजस्थान का ज्यादा एरिया, वहाँ आपको नौकरी पेशा लोग ज्यादा मिलेंगे या मेहनत करने वाले लोग ज्यादा मिलेंगे। वहां पर फिर बुद्ध की उपलब्धता कम है। और अभी सुबह श्रवण जी ने एक बात कही, बड़ी प्यारी बात कही, सुन रहा था मैं, कि आप देखिए, जहां-जहां समुद्र है, वहां कितनी समृद्धि है। अरे भाई, कैसे ना हो, चंद्र से ही तो बुध पैदा होता है। अगर चंद्र ही नहीं होगा, तो बुध नहीं होगा।

 

अब महत्वत्ता देखिए किसकी पहली लगाओंगे? आसमान की सोचें तो सूरज है, धरती की सोचें तो बृहस्पति है, और जीव की सोचें तो चंद्रमा है, और जीवन चलाने की सोचें तो बुध से बड़ा शक्तिमान इस धरती पर है ही नहीं। और लाल किताब बुध को कहती है, शक्तिमान बुध, शक्तिमान बुध। यानी कि ये सारे ग्रह निकम्मे-निठल्ले हो जाएंगे अगर बुध न हुआ तो किसी काम के नहीं, क्योंकि जब धरती पर जीव ही नहीं रहा, जीवों के लिए व्यवस्था ही नहीं रही, पेड़-पौधे नहीं रहे, पक्षी नहीं रहे, तो फिर काहे के ग्रह, फिर तो इनको चाहे कुछ भी बोल दो। और जो रहेगा वो बोलेगा, और जो रहेगा ही नहीं वो बोलेगा ही क्या।

 

तो शक्तिमान हुआ बुध, इसलिए सारी दुनिया शनि, राहु, केतु से डरती है। लाल किताब वाले बुध से डरते हैं। यही कारण है। तो यहाँ से साइंस शुरू होती है। अब क्या देखना है तुम्हें? अब देखना है, जब भी किसी की जन्म कुंडली उठाओ, तो सबसे पहले बुध को देखना बेहद लाजमी है। अगर बुध को नहीं देखा, तो आप कुछ नहीं देख सकते। लेकिन बुध अपने आप में इतना निराला है, बिन पैंदे का लोटा है। एक तरफ बड़ा व्यापारी है और दूसरी तरफ नाचने वाला किन्नर भी है। वही बुध हमारी कन्या है, और वही बुध हमारी बहन है, और वही बुध बाद में किसी की भार्या है। तो बुध के स्वरूप देखिए, ना कितने हैं। तो ये बुध के बिना कुछ भी संभव नहीं, और धरती पर जब माँ ही नहीं होगी, बेटी नहीं होगी, तो माँ ही नहीं होगी। इसलिए बुध सर्वशक्तिमान है।

 

तो सबसे पहले बुध देखिए, अगर बुध अच्छा है। अब बुध को कैसे अच्छा-बुरा तोलते हैं? बुध को अच्छा-बुरा तोलने के लाल किताब के कई तरीके हैं। जो लाल किताब को जानने वाले हैं, उनके पास तो लॉ है कि तीसरे घर में अगर बुध बैठा है और नौवें, ग्यारहवें के अंदर कोई भी ग्रह है, तो बुध खराब है। नौवें घर के अंदर अगर बुध बैठा है और एक, तीन, छह, सात, नौ, ग्यारह के अंदर अगर चंद्र-केतु-बृहस्पति नहीं है, तो बुध खराब है। छठे घर के अंदर बुध बैठा है और पांचवें घर के अंदर जाकर शुक्र बैठ जाए या शुक्र छठे घर में बैठा है और पांचवें घर के अंदर जाकर बुध बैठ जाए, तो बुध खराब है। तो ज्योतिषी तो ऐसे तोलते हैं, लेकिन एक आम इंसान कैसे तोलता है? तेरे मसूड़ों से बदबू आती है, तेरा बुध खराब है। तू जो भी खाना नहीं पचा पाता, तेरा बुध खराब है। तेरे दांत गिर रहे हैं, तेरा बुध खराब है। तुझे स्किन इंफेक्शन बहुत होते हैं, तेरा बुध खराब है।

 

तो सबसे पहले किसी को भी जीवन देने के लिए, जीवनदान देने के लिए, जीवन का कल्याण करने के लिए उसका बुध का इलाज होना बेहद जरूरी है, वरना जितने कोर्ट-कचहरियों के चक्कर हैं, जितने भी सलाह ले-लेकर के डूबने वाले चक्कर हैं, जितने भी पेपर वर्क के अंदर फंसे हुए लोग हैं, इन सबका बुध खराब है। चाहे वो कितने भी स्मार्ट हों, लेकिन बुध अपना खेल खेल देता है। तो सबसे पहले बुध को देखिए, उसके बाद फिर आपको चंद्रमा पर आना है।

 

क्योंकि चंद्रमा, चंद्रमा का अच्छा या बुरा तोलना बेहद जरूरी है। चंद्रमा अगर बहुत अच्छा है, तो इंसान दिल का सख्त, वायदे का पक्का, जो जुबान करेगा वही करेगा। फायदा-नुकसान बहुत अच्छा तोलकर उसके ऊपर एप्लाई करेगा। और अपने हाथ से अपना फायदा नहीं जाने देगा। ये चंद्रमा के अच्छे होने की निशानी है और लोग उनको बोल देते हैं कि बहुत क्रूर दिल का है, इसको तो दया भी नहीं आती। तो चंद्रमा अगर अच्छा नहीं होगा, तो आदमी ब्याजखोर कैसे होगा? ब्याज खाना है, तो चंद्रमा अच्छा करना पड़ेगा। और चंद्रमा अच्छा नहीं है, ना तो ब्याज देने के बाद सामने वाले ने कहीं भरमा दिया, ना तो बाद में उसको कहेगा चल छोड़, तू ब्याज तो छोड़, तू थोड़े से पैसे और ले ले। ये चंद्रमा नरम वाले करते हैं।

 

और दुनिया के अंदर अगर किसी इंसान का कोई चरित्र नहीं है, बिल्कुल ही खराब है, बिन पैदें का लोटा कहीं भी लुढ़क जाएगा, कहीं से भी अपने सुख तलाशेगा, वो कौन करता है? जब तक जन्मकुंडली के अंदर बुध-चंद्र-शुक्र तीनों ग्रह अगर अशुभ नहीं होंगे, तब तक आदमी का बहुत गिरा हुआ चरित्र नहीं हो सकता। यह तीनों गिर जाएं तो बहुत गिरा हुआ चरित्र होता है। और ऐसा इंसान सारी जिंदगी काम करके भी वो किसी लायक नहीं रहता और कमाने के बाद भी व्यथाओं में फिर घिरता है, बेवकूफियों में फिर घिरता है, फिर गवाता है, फिर कमाता है, ये बार-बार होता है। और जिसका चंद्रमा और बुध खराब हो जाए, उस इंसान का बचपन मिट्टी में मिल जाता है और 34 साल की उम्र तक ढंग से कमाई नहीं कर सकता। और अगर कहीं चंद्र-बुध-शुक्र तीनों खराब हो जाएं, तो 34 साल के बाद भी वो कमाई नहीं कर सकता, वो ठग सकता है। तो चंद्र-बुध खराब हो तो 34 साल की उम्र के बाद कमाई करेगा।

 

और चंद्र-बुध-शुक्र खराब़ तो ये बाद में भी कमाई करने के लिए जद्दोजहद करेगा। लेकिन यहाँ एक और उल्टी गेम है, वो क्या है? लाल किताब कहती है जो शनि फल देगा वही चंद्रमा फल देगा और चंद्रमा फल देगा वही शनि फल देगा। अब फिर फँस गए, साइंस तो फँसाने वाली होती है ना। अब शनि को देखना कितना ज़रूरी हो गया, शनि चंद्रमा को मार देता है, राहु शनि को मार देता है और चंद्र-बुध स्वयं भी शनि को मार देते हैं। यहाँ पर साइंस की लड़ाई शुरू होती है, इसमें ये मिलाया है, इसमें ये मिलाया है, यह बन गया।

 

एक लॉ है कि चंद्र या बुध या चंद्र-बुध बारहवें स्थान पर हो तो शनि कभी अच्छा फल नहीं देगा। आँख बंद करके मान लेना। शनि पहले घर में हो, सातवें घर में कोई भी ग्रह हो, चंद्रमा मर जाता है। ऐसा इंसान समझाने में सिर्फ अपनी समझाएगा, दूसरे की नहीं समझेगा। बाप और भाई से तकरार रहेगी, जीवनसाथी के साथ समझा-समझा कर उसे इतना पका देगा, जीवनसाथी कहेगा, "भांड में गई तेरी समझ, तू अकेला सो मैं दूसरे कमरे में सोऊंगा।" यह पंगा पड़ेगा। क्योंकि कोई नसीहतें भी कितनी सुन सकता है, कभी कोई प्यार का इजहार कर, कभी कोई बात कर, कोई गृहस्थी की दूसरी बातें कर, दुनियादारी की बातें कर रोज समझाता ही रहेगा। एक अकेला तू ही दुनिया में समझदार पैदा हुआ है। उसे बोलते हैं चंद्रमा मर जाना।

 

राहु खराब अष्टम में हो, बारहवें में हो, शनि को मार देता है और शनि मर गया, फिर चंद्रमा मर गया। शनि मर गया, फिर चंद्रमा मर गया तो ये लोग भी बस अपनी सुनाते हैं और किसी की नहीं सुनते। सुनाने की कोशिश करोगे तो गुस्से में आ जाएंगे। वहाँ फिर समझने-समझाने का दौर होता है। इन लोगों को टेंशन में कभी पेट में दर्द, कभी सिर में दर्द, आए दिन दवाइयाँ, जीवनसाथी के साथ अलगाव वाली स्थितियाँ, टेंशनें, अंदर से प्यार करते हैं, इजहार कर नहीं सकते, पंगा पड़ जाता है जान को, बीमार होकर हॉस्पिटल और एडमिट होते हैं या रोडवेज वाले, बीवी का गुस्सा, या हसबैंड का गुस्सा, बाहर आप जब किसी को थप्पड़ मारकर निकाल देते हो तो पुलिस का चक्कर भी पड़ता है।

 

देवताओं और ज्योतिष का विज्ञान

 

तो ये जो चीज है, हम सोचें कि हम करते हैं, बहुत बड़ी मूर्खता है, हम कुछ नहीं करते। सच कहा था हमारे बुजुर्गों ने कि हम ऊपर वाले के हाथों की कटपुतलियाँ हैं, वो जैसे हमें नचाते हैं, हम वैसे नाचते हैं और ऊपर देवता बैठे हैं, यह सत्य है। सूर्य नारायण-श्री विष्णु नारायण, चंद्र जी-भोलेनाथ, मंगल जी-हनुमान जी, बुध जी - माँ दुर्गा, बृहस्पति जी - ब्रह्मा जी और गुरुजी, शुक्र देव - माँ लक्ष्मी और शनिदेव - भैरव जी। तो ऊपर देवता ही तो बैठे हैं और कौन बैठा है, लेकिन अगर पूजा की थाली रखकर एस्ट्रोलॉजर यह कहेगा कि प्रभु, इस बार मेरी सुन लेना, मेरी लॉटरी लगवा देना, तो उससे बड़ा मूर्ख एस्ट्रोलॉजर कोई नहीं होगा। यह मैं अपने परिवार को बोल रहा हूँ, किसी और को नहीं।

 

वहां पर आपको यह देखना है कि इस देवता से मुझे यह प्राप्त करना है तो मैं कौन से उपाय की साधना करूं कि ये देवता प्रसन्न हो जाएं। पहले मंत्र विज्ञान था और उम्र भी ज्यादा हुआ करती थी, तो हजारों साल तक रावण जैसे मंत्र विज्ञान और समाधि लगाकर और साधना के बल पर भोलेनाथ से मनचाहा लंका का दान भी ले लेते थे। तो इसका मतलब क्या है? कि अगर चंद्रमा में बल होगा तो आप सोने की लंका में रहोगे। इसलिए चंद्रमा को भी लक्ष्मी अवतार कहा गया है। सातवें घर में जब चंद्रमा होता है तो उसे लक्ष्मी अवतार बोला जाता है और वैसे तो मैं पहले भी यह बोल चुका हूं। अमीर किस-किस को बनना है और बहुत अमीर किस-किस को बनना है?

 

आपको पता है हमारे मंदिरों के अंदर पंचामृत बनाने की प्रथा है, परमात्मा को स्नान करवाने की प्रथा है। जो पंचामृत बनाकर परमात्मा को स्नान करवा कर गृहण करता रहेगा, वो अमीर जरूर बनेगा। रीजन ये है कि जन्म कुंडली के अंदर जिसका भी मंगल शुद्ध है, अच्छा है, अच्छे स्थान पर है और जिसका भी जागृत है, उस इंसान पर कभी कर्जा नहीं होता। और जिसका भी मंगल खराब है या सोया हुआ है, वो इंसान दिखावे की लाइफ या जिम्मेदारियाँ पूरी करने के पीछे कर्जा ही कर्जा इकट्ठा करके अपना सब कुछ बेच डालता है। तो अच्छे धन का कारक मंगल और बुरे भाग्य का कारक मंगल। कारण, आप दिल के अच्छे हो सकते हो, आपके पास ज्ञान अच्छा हो सकता है, आपके पास प्लानिंग हो सकती है, लेकिन जब तक आप हिम्मत करके इन चीजों का प्रयोग नहीं करोगे, तब तक आप बेकार हो। हिम्मत के बिना, प्लानिंग, ज्ञान कुछ भी हो, सब बेकार है। इसलिए हमारे यहाँ माँ वैष्णों देवी जी का दरबार है। वैष्णों देवी जी के दरबार में क्या समझाया गया है, आपको पता है? वैष्णों देवी जी जब हम जाते हैं और जाकर दर्शन करते हैं, तो सामने हमें क्या मिलता है? हमें तीन पिंडियाँ मिलती हैं। बीच में माँ लक्ष्मी बैठी हैं, लेफ्ट में देखो माँ सरस्वती बैठी हैं, और राइट की तरफ माँ काली विराजमान हैं। तो ये लक्ष्मी क्या है? ये सरस्वती मैया, जो हमें ज्ञान, प्लानिंग, जान-पहचान, लोगों के साथ मिलना, उठना-बैठना, मीठा बोलना, मीठा बोलकर अपना बनाना, यह सारी विद्या माँ सरस्वती देती हैं। और जब हम इस सरस्वती का प्रयोग करने के लिए माँ काली को जागृत करते हैं, यानी कि हिम्मत करके दुनियादारी के अंदर उतरकर जबरदस्ती अपना ज्ञान दिखाते हैं, तो किसी न किसी को मना कर जरूर कमा लेते हैं। इसलिए सेंटर में माँ लक्ष्मी बैठती हैं।

 

तो अपने दिमाग के अंदर हमेशा माँ वैष्णों देवी का स्मरण रखो और स्मरण यह रखो कि माँ दुर्गा मेरे घर पर आएं, लेकिन कोशिश तो आपको लाने की मैं ही करूंगा सरस्वती और काली के बलबूते। इसलिए आज के बाद आप सबको एक गुरु मंत्र देता हूँ कि सुबह उठकर जब आप पहले अपने हाथ देखते हैं, तब बोलते हैं।

 

कराग्रे वसते लक्ष्मि: करमध्ये सरस्वति।

करमूले स्थितो ब्रह्मा प्रभाते करदर्शनम् ।।

 

यह करने के बाद आप जो नासिका चल रही हो, पहला पाँव लगाते हैं, लेकिन उसके बाद में एक कर्म यह भी किया करो कि दोनों हाथ उठा लो और कहो, "माँ दुर्गे, मेरे घर आओ, मुझे ज्ञान के साथ-साथ हिम्मत दिलाओ और मेरे घर पर आओ, तेरे नाम का जप करूँगा, तेरे नाम के भंडारे करूँगा, तू मुझे समृद्धि दे, मैं तेरे नाम से समृद्धि बाँटूँगा।" तो अपने आप माँ वैष्णो आपको यह भी देगी। तो अगर देखा जाए, ज्योतिष कुछ अलग नहीं है; यह कहा जा सकता है कि पहले ज्योतिष बना, बाद में हमने भगवान के स्वरूप को सजाया। भगवान पहले ही थे, लेकिन विद्वानों ने भगवान को भी तो पहचानना था ना, नहीं तो वो भी अंजान रह जाता। तो उन्होंने भगवान को पहचानने के लिए पहले ज्योतिष बनाया, ज्योतिष बनाकर फिर उन्होंने भगवान का स्वरूप बनाया और स्वरूप बनाकर के बाद में मंदिरों के अंदर स्थापित किया। और कि लो भक्तों, तुम्हारा जो ग्रह कमजोर है, जाओ उसकी पूजा करके, उसके विधि-विधान करके अपनी झोली भर लो, अपने फल पाओ। इसलिए मंदिरों में जाना कितना जरूरी हो गया है।

 

लेकिन मैं आप सबको एक सलाह देना चाहता हूँ कि आपको जो दुख हो, जिस ग्रह से संबंधित जो दुख हो, कोशिश करिए कि आपके एरिया के अंदर जो भी मंदिर हो, उसके अंदर ज्यादा बड़ा स्थान जिस देवता को दिया गया है, उस देवता से, उस ग्रह से, दुखी इंसान को उसी मंदिर में ही भेजिए। उस मंदिर में बिल्कुल मत भेजिए जहाँ एक तरफ राम दरबार है, यहाँ हनुमान जी हैं, लेकिन यही शनिदेव की मूर्ति लगा दी है। वहाँ जाना आपका व्यर्थ हो जाएगा। कारण क्या है? हम तो यह मानते हैं कि ये भगवान हैं, और ये बिल्कुल सच भी है। लोग यह तर्क दे देते हैं भोले लोग, भगवान तो किसी का बुरा करते नहीं, यह सत्य है। लेकिन जब बहुत सारी चीजों का आपस में मिश्रण हो जाता है, तो वो भी तो सूट नहीं करती। अरे, किसी को दूध से एलर्जी है, किसी को अनाज से एलर्जी है, किसी को फ्रूट से एलर्जी है। तो ये दूध, अनाज, फ्रूट खिलाने वाले भी तो ये ग्रह हैं और ग्रह हैं तो यानी देवता हमें खिलाने वाले हैं और जिस चीज से एलर्जी है, समझ लो उसका देवता रुठा हुआ है। और कहीं ऐसे मंदिरों में जाकर वह एनर्जी भी आपके साथ आ गई, तो आपकी तबीयत बिगड़ जाएगी। फिर बाद में कहोगे भगवान से विश्वास उठ गया, भगवान तो सुनता ही नहीं।

 

शरीर, ऊर्जा और ग्रहों से संबंधित औषधियाँ

 

पूरा शरीर और पूरे शरीर की जरूरत का मतलब क्या है? सूर्य। यानी धरती पर सूर्य की बहुत सारी वस्तुएँ हैं। लेकिन शरीर को स्वस्थ, तंदुरुस्त रखने के लिए बहुत पुराने समय से, ना, हमारे यहाँ बुजुर्गों के टाइम से अजवाइन का प्रयोग होता आ रहा है। माएँ सुबह बच्चों को पराठा भी बना कर देती हैं, तो उसमें अजवाइन डाल देती हैं। तो 100 ग्राम अजवाइन होनी चाहिए अपने शरीर को स्वस्थ रखने के लिए।

 

उसके बाद हमें हवा, ऑक्सीजन अंदर जानी चाहिए। ऑक्सीजन अंदर जाकर जो हमारे जोड़ों के अंदर की ग्रीस है, जो जोड़ो को चलाती है, घुटनों को जो चलाती है, ये ग्रीस बरकरार रहे, इसको दुरुस्त करने के लिए धरती पर बृहस्पति, केतु, मिश्रित जो सबसे बढ़िया चीज है, वो है मेथी दाना। तो 100 ग्राम यह भी लीजिए। लेकिन हमारे खून को प्योर रखें, रेड सेल्स, वाइट सेल्स को अपनी-अपनी जगह पर दुरुस्त रखें, वो तो मंगल की वस्तु होगी ना, तो वो होंगे करेले के बीज, कड़वा नीम, करेला भी नीम की श्रेणी में आता है। तो 100 ग्राम यह भी लीजिए। यानी कि 100 ग्राम अजवाइन, 100 ग्राम मेथी दाना, 100 ग्राम करेले के बीज। अब इन सब के अंदर राहु का अगर करंट भरना है, जो आपके दिमाग को भी दुरुस्त रखें, नसों के अंदर की गंदगी को साफ रखें, आपको एनर्जेटिक रखें, दूर तक सोचने की प्लानिंग दे क्योंकि सरस्वती का कारक है। तो राहु को दुरुस्त करना कितना जरूरी है क्योंकि पूरे शरीर का करंट चलता ही राहु से है। इसलिए छठे घर में लाल किताब के अनुसार बताया गया है कि राहु यहाँ पर कारक है, यहाँ पर उच्च का होता है। यानी राहु बहुत कुछ करता है। तो ऐसी अवस्था में 20 ग्राम कलौंजी के बीज, कलौंजी के बीज राहु के साथ, आप कहो कि राहु की ताकत को लिए हुए है।

 

तो इन सबको आपस में पीस लो, लेकिन थोड़ा दरदरा पीसना, ज्यादा पाउडर बना दिया ना तो अंदर भी नहीं जाएगा। तो थोड़ा दरदरा, हल्का दाना रखते हुए इसको पीस लो। जितने शुगर के मरीज हैं, जितने गैस-एसिडिटी के मरीज हैं, जिनके शरीर में ताकत नहीं, जिनके मसल्स जल्दी टूट रहे हैं, जिनके अंदर एनर्जी नहीं रहती, कंसंट्रेशन नहीं होती, बहुत आगे नहीं बढ़ रहे, उनको भर के सुबह एक चम्मच खिलाना, देखना जीवन कैसे आगे बढ़ता है। और यह आज का मेरा सबसे बड़ा तोहफा था, जो ग्रहों को पीस के आपके लिए मैं लाया हूँ। जय माता की। खुश रहो, सुखी रहो।

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Mars Mahadasha is the kind of phase where life doesn’t stay “slow” for long; it always suddenly picks up speed. You...

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mercury mahadasha

Mercury Mahadasha: Meaning, Effects, Antardasha , Importance, and Effective Lal...

In astrology, Mercury Mahadasha is not just a planetary period; it is a phase that reshapes how a person thinks, acts, and experiences life. Among all planetary Mahadashas, Mercury Mahadasha...

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Ketu Mahadasha

Ketu Mahadasha: Meaning, Effects, Antardasha, Importance, and Effective Lal Kitab...

In astrology, Ketu represents spirituality, detachment, and sudden changes. His lessons aren't always comfortable, but they're essential for your soul's growth. Where other planets give, Ketu takes away, not to...

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mangal ki mahadasha

मंगल की महादशा क्या है? अंतर्दशा, लक्षण, महत्व और लाल...

ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की चाल और उनकी महादशाओं का हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। जब हम मंगल (Mars) की बात करते हैं, तो हमारे मन में साहस,...

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chandrma ki mahadasha

चन्द्रमा की महादशा क्या है? अंतर्दशा, लक्षण, महत्व और लाल...

ज्योतिष के अनुसार, चन्द्रमा की महादशा कुल 10 वर्षों की होती है। यह कालखंड भावनाओं, संवेदनशीलता और मानसिक परिवर्तनों का समय होता है। यदि आपकी कुंडली में चन्द्रमा शुभ स्थिति...

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saturn mahadasha

Saturn Mahadasha: Meaning, Effects, Antardasha, Importance & Lal Kitab Remedies

Saturn Mahadasha is not only about suffering but also about transformation through your discipline towards your life. When you understand it as a lesson, Saturn becomes a savior, guiding you...

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