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कल्कि अवतार - कलयुग के अंत के लक्षण
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म्लेच्छ निवह-निधने कलयसि करवालम् ||

धूमकेतुम् इव किम् अपि करालम् ||

केशव धृत कल्कि शरीर जय जगदीश हरे ||10||

"हे केशव! हे परमात्मा गोविन्द हे हरि, जिन्होंने कल्कि का रूप धारण किया है, आप एक धूमकेतु की तरह दिखाई देते हैं और दुष्टों के विनाश के लिए एक भयानक तलवार लेकर चलते हैं और कलियुग के अंत में भ्रष्ट हो चुकी मानवजाति का उद्धार करते है। आपकी सदा जय हो !"

हिन्दू धर्म ग्रंथों के अनुसार समय के चक्र को चार हिस्सों में विभाजित किया गया है जिसे हम युग कहते है। सबसे पहला युग सतयुग, दूसरा त्रेता, तीसरा द्वापर और चौथा और आख़िरी कलयुग। इस समय हम दैत्य कलि के युग में रहते हैं जिसे कलयुग कहा जाता है। इसकी शुरुआत पांच हजार साल पहले राजा परीक्षित की मृत्यु के साथ हुई थी। भविष्य देखने में सक्षम स्वयं भगवान् विष्णु के अवतार श्री व्यास मुनि ने इस युग में होने वाले भ्रष्ट आचरण का वर्णन द्वापर युग में ही कर दिया था।

कलयुग को लेकर उनकी भविष्यवाणी के अनुसार धर्म, सत्यता, स्वच्छता, सहनशीलता, दया, शारीरिक शक्ति, स्मृति और जीवन की अवधि दिन- ब कम होती जाएगी, पुरुष और महिलाएँ केवल मौखिक सहमति से ही विवाह करेंगे, केवल धनवान होने से ही व्यक्ति सम्माननीय माना जाएगा (भले ही उसकी आदतें पशुवत् हों), और साथ ही में अकाल, भूकंप और महामारी जैसी प्राकृतिक आपदाओं की भी भविष्यवाणी श्री वेद व्यास जी ने की।

कलियुग के अंत में अभी 427,000 वर्ष शेष हैं। इस अवधि के अंत तक लोग तीन फुट ही लंबे रह जायेंगे। इनका वर्ण भूरा हो जायेगा और उम्र केवल 20 वर्ष रह जाएगी। धर्म पूर्णतः भ्रष्ट हो जायेगा, मानव ही मानव मांस का भक्षी हो जाएगा। धरती पर निरंतर अशांति और सामाजिक उथल- पुथल होगी और इस समय भगवान् व्यास की भविष्यवाणी के अनुसार भगवान विष्णु प्रकट होंगे और सभी दोस्तों का विनाश कर दोबारा स्वर्ण युग की स्थापना करेंगे।

भगवान् का यह अवतार श्री कल्कि के नाम से विख्यात होगा और भगवान् कली पुरुष का अंत कर कलयुग का अंत करेंगे। भगवान् का यह स्वरूप अत्यंत मनमोहक मेघवर्ण होगा और भगवान् पीताम्बर धारी वेश में होंगे। वह हाथ में नन्दक तलवार लिए एक सफेद घोड़े पर सवार होंगे। उनका जन्म हिमालय में स्थित सिद्धाश्रम में एक ब्राह्मण कुल में होगा और वह श्री परशुराम जी के शिष्य होंगे। और भगवान् की पत्नी बनेंगी देवी वैष्णवी।

देवी वैष्णवी का जन्म त्रिदेवी (काली, लक्ष्मी, सरस्वती) की सम्मिलित शक्तियों से हुआ। द्वापर युग में देवी वैष्णवी ने भगवान् राम का वरन करने की इच्छा व्यक्त की। तब श्री राम ने अपने एक पत्नी व्रत होने के कारण देवी के प्रस्ताव को नकार दिया और उन्हें आश्वासन देते हुए कलयुग तक प्रतीक्षा करने को कहा। तब से अब तक देवी वैष्णवी भगवान् नारायण को अपने पति के रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तप में लीन है। कलयुग में देवी वैष्णवी ही कली पुरुष की घातक शक्तियों को नियंत्रण में कर धर्म की रक्षा कर रही है। अपने कलयुग में जब वह कल्कि स्वरूप में प्रकट होंगे तब वह माता वैष्णोदेवी को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार करेंगे।




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Gurudev GD Vashist

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Gurudev GD Vashist is also the author of Lal Kitab Amrit Vashist Jyotish. He is prominent in the India electronic media, like, leading TV channels like India News, Divya TV, Sadhna TV, Disha TV.
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